आतंकी हमजा बुरहान का अंत: पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड की पीओके में अज्ञात हमलावरों ने की हत्या

National News: पुलवामा आतंकी हमले की साजिश में शामिल मास्टरमाइंड हमजा बुरहान का पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद में खात्मा हो गया है। अल-बदर आतंकी संगठन से जुड़े हमजा बुरहान को अज्ञात बंदूकधारियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने सीमा पार बैठे आतंकी संगठनों में भारी खलबली मचा दी है।

आतंकी की मौत के बाद उसके पिता की प्रतिक्रिया ने सबको चौंका दिया है। पिता ने खुलकर कहा कि हमजा ने आतंक का रास्ता चुनकर परिवार को केवल दुख और परेशानियां दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमजा पढ़ाई के बहाने पाकिस्तान गया था लेकिन वहां जाकर उसने रास्ता भटक लिया। पिता ने कहा, “अच्छा हुआ वह मारा गया।”

हमजा बुरहान मूल रूप से दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। साल 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई के नाम पर पाकिस्तान जाने वाला हमजा धीरे-धीरे अल-बदर आतंकी संगठन का खूंखार कमांडर बन गया। भारत सरकार ने 2022 में उसे आधिकारिक तौर पर ‘आतंकवादी’ घोषित कर यूएपीए (UAPA) के तहत प्रतिबंधित किया था।

कश्मीर में खड़ा किया था कट्टरपंथ का जाल

कश्मीर में सक्रिय रहने के दौरान हमजा ने पुलवामा से लेकर शोपियां तक युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम किया। वह दक्षिण कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का मुख्य सूत्रधार था। सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से उसकी तलाश थी। उसका खात्मा पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

पुलवामा आतंकी हमला 14 फरवरी 2019 को हुआ था, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। लेथपोरा में हुए उस आत्मघाती हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमजा जैसे आतंकियों के शामिल होने के बाद से सुरक्षा एजेंसियों की लिस्ट में वह हमेशा शीर्ष पर था। उसके सफाए को इस हमले के खिलाफ एक न्यायपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तान में ‘अज्ञात हमलावरों’ का खौफ

पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान की धरती पर कई शीर्ष आतंकियों की इसी तरह ‘धुरंधर स्टाइल’ में हत्याएं हुई हैं। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के लिए अब पाकिस्तान में सुरक्षित रहना मुश्किल हो गया है। इन लगातार हो रही घटनाओं से आतंकी संगठनों का मनोबल टूट रहा है और उनके नए कैडर भर्ती करने की क्षमता भी कम हुई है।

पाकिस्तान सरकार और वहां की खुफिया एजेंसियां इन घटनाओं पर खामोश हैं, लेकिन यह साफ है कि आतंकी संगठनों में डर का माहौल व्याप्त है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से इन गुटों की संगठनात्मक क्षमता काफी कमजोर हुई है। हमजा बुरहान का मारा जाना यह साबित करता है कि अब सीमा पार के आतंकियों के लिए बचना बहुत कठिन हो गया है।

Author: Raj Thakur

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