Brussels News: यूरोपीय संघ (EU) के प्रमुख सदस्य देश चीन की कथित ‘इंडस्ट्रियल डंपिंग’ के खिलाफ एक साझा मोर्चा तैयार कर रहे हैं। स्पेन, इटली, नीदरलैंड, फ्रांस और लिथुआनिया ने एक संयुक्त दस्तावेज के जरिए मांग की है कि यूरोपीय आयोग चीन के अनुचित व्यापारिक व्यवहारों के प्रति अधिक सख्त और आक्रामक रुख अपनाए।
आगामी शुक्रवार को ब्रसेल्स में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक से पहले यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दस्तावेज में सेक्टर-वार डंपिंग को रोकने के लिए आपातकालीन टैरिफ और कोटा सिस्टम को तेजी से लागू करने का सुझाव दिया गया है। सदस्य देशों का तर्क है कि चीन की ‘सिस्टमेटिक डंपिंग’ से यूरोपीय उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है।
यूरोपीय देशों का यह प्रस्ताव मुख्य रूप से चीन पर निर्भरता को कम करने पर केंद्रित है। इसमें एक नए ‘लचीलापन टूल’ (Resilience Tool) का जिक्र है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि महत्वपूर्ण उद्योगों के लिए कच्चे माल और पुर्जों की आपूर्ति केवल एक देश पर निर्भर न रहे। कंपनियों को अब दो अलग-अलग देशों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
चीन के व्यापारिक व्यवहार से यूरोप का असंतोष गहराता जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन की अनुचित प्रथाओं के चलते साल 2019 से 2025 के बीच यूरोप में करीब 10 लाख नौकरियां खत्म हुई हैं। केवल जर्मनी में ही चीन के साथ व्यापारिक असंतुलन के कारण 4 लाख से अधिक रोजगार प्रभावित होने का अनुमान है, जिसने बर्लिन पर भी नई नीति अपनाने का दबाव बढ़ा दिया है।
फ्रांस की आक्रामक रणनीति और जर्मनी का बदलता रुख
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहले ही अमेरिकी ‘धारा 301’ (Section 301) की तर्ज पर सख्त टैरिफ तंत्र लागू करने की वकालत कर चुके हैं। अब इटली और नीदरलैंड जैसे देश भी इस सुर में सुर मिला रहे हैं। नीदरलैंड, जो पहले मुक्त व्यापार का समर्थक था, अब अपनी तकनीकी कंपनियों की सुरक्षा के लिए चीन के खिलाफ अधिक सुरक्षात्मक उपाय चाहता है।
जर्मनी का रुख अभी भी सावधानीपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि बर्लिन के व्यापारिक संबंध बीजिंग के साथ काफी गहरे हैं। हालांकि, ब्रसेल्स को उम्मीद है कि औद्योगिक दबाव और नौकरियों के नुकसान के आंकड़ों को देखते हुए जर्मनी भी अंततः इस नए साझा रुख का समर्थन करेगा। जर्मनी की अर्थव्यवस्था मंत्री की आगामी चीन यात्रा इस संदर्भ में काफी निर्णायक हो सकती है।
यदि यूरोपीय आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो आने वाले समय में चीन के लिए यूरोपीय बाजारों में अपने सस्ते उत्पादों को डंप करना काफी मुश्किल हो जाएगा। यह कदम न केवल यूरोपीय औद्योगिक आधार को बचाने की कोशिश है, बल्कि वैश्विक व्यापारिक संतुलन को फिर से निर्धारित करने का एक बड़ा प्रयास भी माना जा रहा है।
Author: Harikarishan Sharma

