राप्ती नदी के कहर से गोरखपुर को बचाने के लिए योगी सरकार का बड़ा एक्शन, हाबर्ट बांध बना फोरलेन, पांच दशक पुराना संकट खत्म

Gorakhpur News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बड़ी पहल पर राप्ती नदी की विनाशकारी बाढ़ से महानगर को पूरी तरह सुरक्षित करने का काम बहुत तेजी से चल रहा है। सरकार शहरवासियों को एक बेहतरीन वैकल्पिक यातायात मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऐतिहासिक हाबर्ट तटबंध को अब फोरलेन में तब्दील कर रही है।

इसी महायोजना के तहत सिंचाई विभाग ने दशकों पुराने रेग्युलेटरों की जगह 30.28 करोड़ रुपये की भारी लागत से नए आधुनिक रेग्युलेटर बना दिए हैं। गोरखपुर में राप्ती नदी के बाएं तट पर ब्रिटिश शासन काल में बने इस 3.9 किलोमीटर लंबे हाबर्ट तटबंध का चौड़ीकरण युद्धस्तर पर जारी है।

पहले इस महत्वपूर्ण तटबंध के शीर्ष की कुल चौड़ाई केवल सात मीटर थी। अब लोक निर्माण विभाग इसे शानदार फोरलेन सड़क के रूप में विकसित कर रहा है। विभाग इसकी चौड़ाई को बढ़ाकर 25 मीटर कर रहा है। दूसरी ओर तटबंध पर पुराने रेग्युलेटरों का पुनर्निर्माण भी पूरा हो चुका है।

सिंचाई विभाग के ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता आनंद गौतम ने विशेष जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि मजबूत बॉक्स ड्रेन बना कर हाबर्ट बांध फोरलेन पर नए सिरे से आधुनिक रेग्युलेटर का निर्माण किया गया है। यह इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन और नायाब नमूना है।

बारिश और बाढ़ के दौरान जलनिकासी की समस्या से मिलेगी बड़ी राहत

इस नई परियोजना से भारी बारिश और बाढ़ के दौरान होने वाली जलनिकासी की भीषण समस्या से शहर को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। महानगर की बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था भी पहले के मुकाबले कई गुना अधिक मजबूत होगी। इन नए रेग्युलेटर के मजबूत गेट सिंचाई विभाग के कार्यशाला खंड ने लगाए हैं।

इसके साथ ही सिंचाई विभाग सभी आठों रेगुलेटरों के नालों पर बहुत ही आधुनिक ‘ट्रेस रैक’ भी लगाने जा रहा है। मजबूत लोहे की जालियों वाले इन ट्रेस रैक के लग जाने से शहर का ठोस कचरा सीधे पवित्र नदी में प्रवाहित नहीं हो पाएगा।

अक्सर नालों के रास्ते बहकर आने वाले मृत पशु और भारी गंदगी भी अब इसी ट्रेस रैक पर आसानी से रुक जाएंगे। सरकार की इस दूरदर्शी तकनीक से राप्ती नदी को प्रदूषित होने से पूरी तरह बचाया जा सकेगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी बड़ा मील का पत्थर है।

प्रशासन ने डोमिनगढ़, बहरामपुर, इलाहीबाग, मिर्जापुर, बसंतपुर नरकटिया, घसियारी, हांसूपुर राजघाट और ट्रांसपोर्टनगर स्थित सभी आठ रेग्युलेटरों का सिविल कार्य पूरी तरह खत्म कर लिया है। इसके साथ ही इन सभी रेग्युलेटर पर स्वचालित गेट लगाने का जटिल यांत्रिक कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

Author: Ajay Mishra

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