Delhi News: दिल्ली में लाल किले के पास हुए भीषण बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक आतंकवादियों ने इस हमले की साजिश रचने और आईईडी बम बनाने के लिए आधुनिक एआई टूल चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया था।
इस खतरनाक साजिश का कनेक्शन वैश्विक आतंकवादी संगठन अल-कायदा की भारतीय शाखा से जुड़ा हुआ है। एनआईए ने कोर्ट में 7,500 पन्नों की एक विशाल चार्जशीट दाखिल की है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक देश में पहली बार डिजिटल तकनीक और एआई का इस तरह का घातक गठजोड़ देखने को मिला है।
यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टरों ने की आतंकियों की मदद
जांच एजेंसी ने खुलासा किया कि इस पूरी आतंकवादी साजिश में हरियाणा की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टर भी शामिल थे। मुख्य आरोपी जासिर बिलाल वानी तकनीकी सहायता लेने के लिए फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में रुका था। वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे विस्फोटक सामग्री और आवश्यक रिसर्च मुहैया कराई थी।
डॉक्टर आदिल अहमद राथर ने जासिर की मुलाकात धमाके की कार चलाने वाले मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी से करवाई थी। इन पढ़े-लिखे डॉक्टरों ने आतंकियों के लिए ‘इंजीनियर’ की भूमिका निभाई। आरोपियों ने आईईडी और रॉकेट बम बनाने के लिए बिल्कुल किसी वैज्ञानिक लैब जैसी साफ-सफाई और बारीकी का इस्तेमाल किया था।
काजीगुंड के जंगलों में हुआ रॉकेट बम का टेस्ट
एनआईए की चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने सिर्फ सामान्य बम ही नहीं बनाए बल्कि ‘रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस’ भी तैयार किए थे। इन खतरनाक हथियारों का परीक्षण जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित काजीगुंड के घने जंगलों में किया गया था। जांच टीम ने इन जंगलों से टेस्ट किए गए विस्फोटकों के अवशेष भी बरामद किए हैं।
आरोपी जासिर वानी ने यूट्यूब और चैटजीपीटी पर रॉकेट बनाने के तरीकों और रसायनों के सही अनुपात की सघन खोज की थी। इसके अलावा डॉक्टर उमर ने जासिर को दो एडवांस ड्रोन भी दिए थे। उमर ने उसे ड्रोन की उड़ान सीमा और वजन उठाने की क्षमता को कई गुना बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
फ्लिपकार्ट से ऑनलाइन मंगाए बम बनाने के पार्ट्स
फॉरेंसिक जांच में सबसे हैरान करने वाली बात आईईडी के ट्रिगर सिस्टम को लेकर सामने आई है। जासिर ने दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच प्रसिद्ध शॉपिंग वेबसाइट ‘फ्लिपकार्ट’ से बम के उपकरण खरीदे थे। उसने सेंसर-इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी स्विच, हीट गन, पीजो प्लेट और रिमोट कंट्रोल रिले-स्विच ऑनलाइन मंगाए थे।
इसके अलावा उसने रेडियो फ्रीक्वेंसी ट्रांसमीटर, रिसीवर किट और सोल्डरिंग किट भी कैश ऑन डिलीवरी के जरिए प्राप्त की थी। इस पूरी ऑनलाइन शॉपिंग का सारा खर्च डॉक्टर उमर ने उठाया था। इन सभी पार्ट्स को मिलाकर एक बेहद जटिल ट्रिगर सिस्टम बनाया गया जिससे धमाके में खतरनाक ‘टीएटीपी’ विस्फोटक को उड़ाया गया।
Author: Raj Thakur


