Patna News: बिहार में गर्मी का पारा चढ़ते ही स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। राज्य में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) के मामले फिर से दर्ज किए जा रहे हैं। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में प्रतिदिन एईएस से पीड़ित 2 से 3 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि समय पर इलाज मिलने से अब तक सभी बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। हालांकि, विभाग ने जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) के मरीजों की कम संख्या के बावजूद किसी भी ढिलाई से मना किया है। मार्च में जेई से एक बच्चे की दुखद मौत के बाद प्रशासन ने निगरानी और तेज कर दी है।
एईएस के लक्षण और सावधानी
चिकित्सकों के अनुसार, एईएस बच्चों के लिए अत्यंत घातक हो सकता है। तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी और शरीर में ऐंठन इसके प्रमुख संकेत हैं। डॉ. राकेश कुमार ने अभिभावकों को सतर्क किया है कि यदि बच्चे में सुस्ती या कमजोरी दिखे, तो बिना देरी किए उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। शुरुआती इलाज ही इस बीमारी से बचाव की एकमात्र कुंजी है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चों को खाली पेट बिल्कुल न रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ दें। गर्मी के मौसम में बच्चों को पोषण की अधिक आवश्यकता होती है। गाँवों से लेकर शहरों तक स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियान चला रहा है ताकि लोग समय रहते बीमारी की पहचान कर सकें और एहतियात बरत सकें।
हीट स्ट्रोक से बचाना है जरूरी
एईएस के साथ ही हीट स्ट्रोक के मामलों ने भी चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चों को धूप में बाहर निकलने से रोकना अनिवार्य है। बाहर जाने की स्थिति में सिर ढककर रखें और ओआरएस या नींबू पानी का सेवन करते रहें।
बच्चों को सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनाएं ताकि गर्मी का असर कम हो। घर से बाहर निकलने से पहले पेट भरा होना जरूरी है। धूप से आने पर तुरंत ठंडा पानी पीने से बचें। शिशुओं और नवजात बच्चों के मामले में अत्यधिक सावधानी बरतें। बंद कमरों में उमस से बच्चों को बचाएं ताकि लू और हीट स्ट्रोक का खतरा कम हो सके।
Author: Amit Yadav


