New Delhi News: उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने केंद्रीय वित्त आयोगों द्वारा एक बार में अगले पांच वर्ष का बजट आवंटन करने की व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने राज्य वित्त आयोग की तर्ज पर प्रत्येक वर्ष केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के हिसाब से बजट जारी करने की पुरजोर मांग की है।
पांच साल के फिक्स बजट आवंटन से पंचायतों को हो रहा भारी नुकसान
नई दिल्ली में आयोजित 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में पंचायती राज मंत्री ने यूपी का पक्ष रखा। उन्होंने साफ कहा कि एक ही बार में पांच साल का बजट तय होने से केंद्रीय करों का संग्रह अधिक होने के बावजूद राज्य की पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग से काफी कम धनराशि मिल पा रही है।
मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में यूपी की पंचायतों को राज्य वित्त आयोग से 14,997 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके मुकाबले 16वें वित्त आयोग से मात्र 10,675 करोड़ रुपये का ही आवंटन हुआ है। उन्होंने इस विसंगति को जल्द से जल्द दूर करने की मांग की है।
गाइडलाइंस में बदलाव से पंचायत सहायकों के मानदेय में आ रही दिक्कत
ओम प्रकाश राजभर ने कार्यशाला में प्रशासनिक दिक्कतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की नई गाइडलाइंस में पंचायतों के लिए तकनीकी व प्रशासनिक मद में फंड की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जबकि इससे पहले के आयोगों में इसके लिए पूरे 10 प्रतिशत बजट का प्रावधान था।
इस तकनीकी प्रशासनिक फंड के न होने से अब ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सहायकों और सामुदायिक शौचालयों के केयर टेकर को समय पर मानदेय देने में बड़ी समस्या आ रही है। उन्होंने आयोग से इस गंभीर व्यावहारिक समस्या पर तुरंत विचार करने और पुरानी व्यवस्था को दोबारा बहाल करने का विशेष अनुरोध किया।
परफॉर्मेंस ग्रांट की शर्तों को व्यावहारिक बनाने की अपील की
उत्तर प्रदेश की 57,694 पंचायतों के विकास के लिए राजभर ने परफॉर्मेंस ग्रांट की शर्तों को अधिक व्यावहारिक बनाने की मांग की। उन्होंने पात्रता शर्तों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों के लिए 1200 रुपये प्रति व्यक्ति न्यूनतम आय का मापदंड यूपी जैसे कम आबादी वाली पंचायतों के लिए पूरी तरह अव्यवहारिक है।
उन्होंने पुराने मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट में हुई कुछ अनियमितताओं के कारण 67 ग्राम पंचायतों की धनराशि अभी भी जांच के चलते लंबित है। ऐसे में कुछ पंचायतों की गलती की वजह से सूबे की अन्य सभी ग्राम पंचायतों का महत्वपूर्ण अनुदान रोकना पूरी तरह अतार्किक है।

