सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की धमाकेदार एंट्री, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कॉलेजियम की सिफारिश पर लगाई अंतिम मुहर

Delhi News: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में आज एक बहुत बड़ा फैसला हुआ है। देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट को पांच नए जज मिल गए हैं। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन सभी पांचों जजों की वीआईपी नियुक्तियों पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पिछले महीने 22 और 27 मई 2026 को कई महत्वपूर्ण बैठकें की थीं। इन बैठकों के बाद कॉलेजियम ने पांच नए नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब न्याय विभाग ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

इन चार हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को मिली पदोन्नति

उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत होने वाले जजों में देश के कई दिग्गज विधि विशेषज्ञ शामिल हैं। इस सूची में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू का नाम सबसे ऊपर है। उनके साथ बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर भी सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा को भी सर्वोच्च अदालत में नियुक्त किया गया है। इनके अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली प्रमोट हुए हैं। कॉलेजियम ने इन चारों अनुभवी मुख्य न्यायाधीशों के शानदार रिकॉर्ड को देखते हुए यह फैसला लिया।

इस बार कॉलेजियम ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला भी लिया है। जजों के अलावा सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ महिला वकील वी मोहना को भी सीधे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सीधे जज बनाने के फैसले की विधिक हलकों में खूब चर्चा हो रही है।

जानिए देश में कैसे काम करता है सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम सिस्टम

भारत में जजों की नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह जिम्मेदार होता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई इस शक्तिशाली कॉलेजियम की अध्यक्षता करते हैं। इस सर्वोच्च कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के चार अन्य सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं।

नियुक्ति की प्रक्रिया प्रक्रिया ज्ञापन के तहत संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शुरू की जाती है। वह अपने दो सबसे सीनियर जजों से सलाह लेकर प्रस्ताव राज्य के मुख्यमंत्री को भेजते हैं। मुख्यमंत्री इस फाइल को औपचारिक रूप से राज्यपाल के पास आगे बढ़ाते हैं।

राज्यपाल इस पूरे प्रस्ताव को जरूरी दस्तावेजों के साथ केंद्रीय कानून मंत्री को भेज देते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार इस पर प्राथमिक जांच कर फाइल मुख्य न्यायाधीश के पास भेजती है। कॉलेजियम की अंतिम मुहर के बाद फाइल दोबारा कैबिनेट के रास्ते राष्ट्रपति के पास पहुंचती है।

Author: Adv Anuradha Rajput

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