हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, पद के अनुरूप ही मिले तैनाती, गलत ट्रांसफर सेवा शर्तों का उल्लंघन

Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की तैनाती को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को उसकी पदवी के अनुरूप ही कार्यभार और तैनाती मिलनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि तबादला कर्मचारी की मूल पदवी को प्रभावित करता है, तो ऐसा आदेश सेवा शर्तों के खिलाफ माना जाएगा।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने यह टिप्पणी सुषमा वर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ता हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में वरिष्ठ निजी सचिव के पद पर कार्यरत हैं। विश्वविद्यालय ने उनका तबादला निर्माण विभाग में कर दिया था, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती दी थी।

कोर्ट ने विश्वविद्यालय के आदेश पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता का कहना था कि निर्माण विभाग में वरिष्ठ निजी सचिव का पद स्वीकृत ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह तबादला उन्हें परेशान करने की मंशा से किया गया। अदालत ने विश्वविद्यालय की स्टाफिंग स्थिति और स्वीकृत पदों का रिकॉर्ड देखने के बाद मामले को गंभीर माना।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि निर्माण विभाग में वरिष्ठ निजी सचिव का कोई स्वीकृत पद मौजूद नहीं है। ऐसे में अदालत ने मुख्य वार्डन कार्यालय से निर्माण विभाग में की गई तैनाती को गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को उस स्थान पर भेजा जाना चाहिए, जहां उसके पद की वास्तविक आवश्यकता हो।

सेवा शर्तों के उल्लंघन पर सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नियोक्ता से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कर्मचारी को उसी पद के अनुरूप जिम्मेदारी दे, जिस पर वह कार्यरत है। अदालत ने कहा कि यदि स्थानांतरण आदेश किसी कर्मचारी की पदवी को काफी हद तक प्रभावित करते हैं, तो उन्हें वैध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को यह छूट भी दी कि यदि आवश्यकता हो तो याचिकाकर्ता का तबादला किसी अन्य डिवीजन में किया जा सकता है। हालांकि अदालत ने साफ कहा कि नई तैनाती उसी स्थान पर होनी चाहिए, जहां वरिष्ठ निजी सचिव का स्वीकृत पद उपलब्ध हो।

कर्मचारियों के अधिकारों पर अहम फैसला माना गया

कानूनी जानकार इस फैसले को सरकारी और विश्वविद्यालय कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण आदेश मान रहे हैं। अदालत की टिप्पणी से यह स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासनिक फैसलों में सेवा नियमों और पद संरचना का पालन जरूरी है। इससे भविष्य के तबादला मामलों पर भी असर पड़ सकता है।

Author: Adv Anuradha Rajput

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