जनगणना के नाम पर देश में शुरू हुआ ठगी का सबसे खतरनाक खेल, एक क्लिक करते ही उड़ जाएगा पूरा बैंक खाता

Meerut News: देश में जनगणना की चर्चाओं के बीच साइबर अपराधियों ने ठगी का बिल्कुल नया और खतरनाक तरीका खोज लिया है। मेरठ शहर में जालसाज खुद को जनगणना अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे फर्जी लिंक और कॉल के जरिए लोगों के बैंक खातों से गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं।

साइबर अपराधी फोन कॉल, व्हाट्सएप मैसेज और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों को लगातार जाल में फंसा रहे हैं। वे जनगणना सत्यापन, डिजिटल आईडी और सरकारी लाभ के नाम पर लोगों को लिंक भेजते हैं। इस लिंक के जरिए मोबाइल नंबर, पहचान पत्र और बैंक खाते की जानकारी चुरा ली जाती है।

लिंक पर क्लिक करते ही खाली हो रहे हैं बैंक खाते

जागृति विहार के एक 62 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक के पास पिछले दिनों एक शातिर का फोन आया। सामने वाले ने खुद को जनगणना विभाग का बड़ा अधिकारी बताया। उसने कहा कि परिवार का रिकॉर्ड अधूरा है। सत्यापन के लिए भेजे गए लिंक को खोलते ही शिक्षक के खाते से हजारों रुपये गायब हो गए।

दूसरा मामला कंकरखेड़ा इलाके से सामने आया है। यहाँ एक महिला के व्हाट्सएप पर एक संदिग्ध मैसेज आया। इसमें लिखा था कि जनगणना के लिए नई डिजिटल आईडी बनाई जा रही है। मैसेज में सरकारी लोगो और अधिकारी की फोटो लगी थी। लिंक खोलते ही मोबाइल का पूरा एक्सेस हैकर्स के पास चला गया।

तीसरे मामले में लिसाड़ी गेट क्षेत्र में दो नकली कर्मचारी सीधे एक परिवार के घर पहुंच गए। वे सदस्यों के निजी दस्तावेजों और बैंक खातों की जानकारी मांगने लगे। परिवार को संदेह हुआ तो उन्होंने सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी। भेद खुलते ही दोनों फर्जी कर्मचारी मौके से तुरंत भाग खड़े हुए।

साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए अपनाए ये पांच तरीके

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ठग मुख्य रूप से पांच तरीकों से जनता को ठग रहे हैं। पहला तरीका फर्जी फोन कॉल का है। इसमें अपराधी खुद को बड़ा सरकारी बाबू बताते हैं। दूसरा तरीका व्हाट्सएप पर फर्जी लिंक भेजने का है। इससे नागरिकों का पूरा मोबाइल फोन आसानी से हैक हो जाता है।

तीसरा तरीका ओटीपी वेरिफिकेशन का है, जिसमें डेटा अपडेट करने के बहाने गोपनीय पासवर्ड मांगा जाता है। चौथा तरीका हूबहू सरकारी पोर्टल जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाना है। पांचवां तरीका फर्जी पहचान पत्र बनाकर सीधे लोगों के घरों तक पहुंचकर व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा चुराना है।

ठगी से बचने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने जारी की एडवाइजरी

केंद्र और राज्य सरकार ने जनता को जागरूक करने के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी फोन पर कभी भी बैंक डिटेल या ओटीपी नहीं मांगता। किसी भी अनजान लिंक को न खोलें और स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने की भूल बिल्कुल न करें।

साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह के अनुसार ठग हमेशा ऐसे विषय चुनते हैं जिनसे बड़ी आबादी जुड़ी हो। ब्रह्मपुरी थाने के साइबर सेल इंचार्ज आशुतोष यादव ने अपील की है कि ठगी होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें। शुरुआती घंटों में शिकायत मिलने पर डूबी रकम वापस मिलने की उम्मीद रहती है।

Author: Ajay Mishra

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