Delhi News: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। इसी महत्वपूर्ण चर्चा के बीच अमेरिका ने एक बार फिर नए आयात शुल्क (टैरिफ) का एलान कर दिया है। इस फैसले से दोनों देशों के व्यापारिक हलकों में खलबली मच गई है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (UTR) ने बुधवार को अपनी विशेष ‘सेक्शन 301’ जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक किया है। इसके तहत भारत समेत दुनिया की 53 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत का भारी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो बेहद हैरान करने वाला कदम है।
अमेरिकी प्रशासन का यह नया और कड़ा प्रस्ताव ठीक ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका के मुख्य वार्ताकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए खुद नई दिल्ली पहुंचे हुए हैं। वे यहां भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठकें कर रहे हैं।
जबरन श्रम पर कड़े प्रतिबंध न लगाने का अमेरिका ने मढ़ा आरोप
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने अपने आधिकारिक नोटिस में स्पष्ट कहा है कि यह कार्रवाई उन देशों पर की जा रही है, जो जबरन श्रम (Forced Labour) से बनी वस्तुओं के आयात पर कड़ा प्रतिबंध लगाने और उसे पूरी तरह से लागू करने में प्रशासनिक स्तर पर विफल रहे हैं।
यूटीआर (UTR) के नोटिस के मुताबिक, जो देश जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर आंशिक नियंत्रण रखते हैं, उन पर भी 10% की दर से अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश की गई है। इस कानून की आड़ में अमेरिका प्रमुख विकासशील देशों की आयात नीतियों को प्रभावित करने की रणनीति अपना रहा है।
भारत ने अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर जांच रोकने की मांग की
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत सरकार ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने वाशिंगटन से इस विवादित जांच को तुरंत समाप्त करने का औपचारिक अनुरोध किया है, ताकि दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर बुरा असर न पड़े।
भारतीय पक्ष का साफ कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को किसी एकतरफा कार्रवाई के बजाय दोनों देशों के बीच चल रही नियमित व्यापार वार्ताओं के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए। भारत इस मामले को बराबरी के स्तर पर हल करने का इच्छुक है।
‘निष्पक्ष और संतुलित’ शर्तों पर ही समझौता आगे बढ़ाएगा भारत
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार इस समय सेक्शन 301 की जांच में पूरी राहत पाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। भारत की कोशिश है कि उसे वैश्विक बाजार में अपने अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बहुत कम और अनुकूल टैरिफ हासिल हो सके।
भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर देश को इस समझौते में “निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित” शर्तें मिलती हैं, तभी वे इस डील को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे कदम बढ़ाएंगे। शर्तों के प्रतिकूल होने पर भारत जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगा।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस द्विपक्षीय समझौते की व्यापक रूपरेखा पूरी तरह तय होने के बाद ही अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत का आधिकारिक दौरा कर सकते हैं। फिलहाल, भारतीय टीम इस अमेरिकी दबाव के आगे बिना झुके बातचीत को तार्किक अंत तक ले जाने में जुटी है।
Author: Gaurav Malhotra


