Delhi News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विमान कंपनियों को बहुत बड़ी राहत दी है। सरकार ने तेल कंपनियों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की ब्याज-मुक्त वित्तीय सहायता मंजूर की है। इस ऐतिहासिक फैसले से हवाई ईंधन की कीमतों में स्थिरता आएगी और आम आदमी को सीधा फायदा मिलेगा।
कैबिनेट के नए फैसले के मुताबिक हवाई किराए में अब अचानक कोई तेजी नहीं आएगी। सरकार विमान ईंधन की कीमतों में उछाल रोकने के लिए एक विशेष मूल्य स्थिरीकरण फंड बनाएगी। इस फंड से तेल विपणन कंपनियों को सीधे वित्तीय मदद मिलेगी। इससे एयरलाइंस का परिचालन खर्च पूरी तरह नियंत्रित रहेगा।
पश्चिम एशिया संकट के कारण ढाई गुना महंगा हुआ हवाई ईंधन
इस बड़े फैसले के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में चल रहा गंभीर तनाव है। वैश्विक कारणों से विमान ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में ईंधन की दर 60.50 रुपये प्रति लीटर थी। यह मई 2026 में बढ़कर सीधे 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।
यह अप्रत्याशित वृद्धि करीब ढाई गुना तक दर्ज हुई है। किसी भी विमान कंपनी के परिचालन बजट में हवाई ईंधन का हिस्सा लगभग 60 फीसदी तक होता है। इसलिए ईंधन का महंगा होना एविएशन सेक्टर के लिए सबसे बड़ा झटका था। सरकार ने समय पर हस्तक्षेप कर इस संकट को संभाल लिया है।
उधर, पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से भी भारतीय विमान कंपनियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इसके कारण यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानें बहुत लंबी हो गई हैं। इससे विमानों का खर्च बढ़ गया है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निलंबित होने से भारत में एविएशन की मांग भी काफी घटी है।
विमानन क्षेत्र के पूरे इकोसिस्टम को बचाने की बड़ी मुहिम
इस संकट के कारण एविएशन सेक्टर से जुड़े हवाई अड्डे, मेंटेनेंस एजेंसियां और लॉजिस्टिक्स सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं। अब सरकार का यह 10 हजार करोड़ रुपये का विशेष फंड काम आएगा। यह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क से ज्यादा कीमत होने पर होने वाले नुकसान की पूरी भरपाई करेगा।
जब ईंधन की कीमतें दोबारा सामान्य और स्थिर हो जाएंगी, तब अतिरिक्त राशि वसूल कर सरकार को लौटा दी जाएगी। देश की सभी भारतीय अनुसूचित एयरलाइंस अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस बेहतरीन योजना का लाभ उठा सकेंगी। इससे पूरे बाजार में एक सकारात्मक माहौल बनेगा।
सरकार ने इस योजना के लाभ के लिए एक जरूरी शर्त भी रखी है। सभी एयरलाइंस को अधिकतम तीन साल तक केवल सरकारी तेल कंपनियों से ही ईंधन खरीदना होगा। यह कल्याणकारी योजना अगले 36 महीनों तक लागू रहेगी। इस दौरान सरकार हर साल योजना की विस्तृत समीक्षा भी करेगी।
योजना को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निगरानी और कड़े ऑडिट की मुकम्मल व्यवस्था की गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और व्यय विभाग के आला अधिकारी इस निगरानी समिति में शामिल रहेंगे। यह समिति दावों के सत्यापन, मिलान और समय पर निपटान की पूरी देखरेख करेगी।
सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में साफ किया है कि कीमतों को स्थिर रखना एक अस्थायी कदम है। तेल कंपनियों के लिए यह दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। पश्चिम एशिया संकट के कारण कंपनियों को काफी नुकसान हो रहा था। इसलिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाकर सेक्टर को संभाला है।
Author: Rajesh Kumar


