Mumbai News: भारतीय नौसेना में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। वरिष्ठ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने पश्चिमी नौसेना कमान के नए प्रमुख के रूप में अपनी कमान संभाल ली है। मुंबई में आयोजित एक भव्य सैन्य समारोह में उन्होंने यह जिम्मेदारी ली।
वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने शनिवार को देश की सबसे महत्वपूर्ण कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का नया पदभार ग्रहण किया। इस बड़ी नियुक्ति से ठीक पहले वे नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय में वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ जैसे अहम पद पर तैनात थे।
नया आधिकारिक पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने सबसे पहले मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड का दौरा किया। वहां स्थित गौरव स्तंभ पर उन्होंने देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर और अमर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जानिए गनरी और मिसाइल सिस्टम एक्सपर्ट का शानदार सफर
वाइस एडमिरल वात्स्यायन भारतीय नौसेना के सबसे काबिल और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्हें एक जनवरी 1988 को नौसेना में कमीशन मिला था। वे गनरी और आधुनिक मिसाइल सिस्टम के बहुत बड़े रणनीतिक एक्सपर्ट माने जाते हैं।
अपने लंबे और शानदार सैन्य करियर के दौरान उन्होंने नौसेना के कई अग्रिम युद्धपोतों की कमान संभाली है। उन्होंने बेहद प्रसिद्ध आईएनएस सह्याद्री, आईएनएस कुठार, आईएनएस विभूति और आईएनएस नाशक जैसे शक्तिशाली युद्धपोतों का बेहद सफल और कुशल नेतृत्व किया है।
इसके अलावा वे पूर्वी नौसेना बेड़े के कमांडर के रूप में भी अपनी बेहतरीन सेवाएं दे चुके हैं। देश सेवा के अपने सफर में वे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी एनडीए के उप कमांडेंट जैसे बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
नौसेना में उनकी इस उत्कृष्ट और अनुकरणीय सेवा के लिए उन्हें अब तक कई बड़े सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें भारत सरकार द्वारा परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और प्रतिष्ठित नौसेना मेडल प्रदान किया गया है।
पश्चिमी नौसेना कमान को भारतीय नौसेना की रीढ़ और सबसे संवेदनशील कमानों में से एक माना जाता है। यह महत्वपूर्ण कमान देश के पूरे पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा और अरब सागर में दुश्मनों की हर चाल को नाकाम करने की जिम्मेदारी संभालती है।
Author: Harikarishan Sharma

