Jammu Kashmir Politics: ‘वह बम जैसा ऐलान कहां है’, सज्जाद लोन ने सीएम उमर अब्दुल्ला की उड़ाई धज्जियां, कश्मीर में सियासी भूचाल

Jammu and Kashmir News: जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन ने बुधवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर तीखा जुबानी हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बहुचर्चित ‘बम जैसी’ बड़ी घोषणा को पूरी तरह खोखला और उम्मीद के विपरीत बताया।

सज्जाद लोन ने पूछा- कहां गया वो ऐतिहासिक एलान?

सज्जाद लोन ने कहा कि सत्तारूढ़ दल के इस कदम ने जम्मू-कश्मीर के आम लोगों को बुरी तरह निराश किया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के करीब 48 विधायक और वरिष्ठ नेता एक वन्यजीव क्षेत्र में एकत्रित हुए थे। इस वीरान जमावड़े ने वहां के मूल वन्यजीवों को भले ही डरा दिया हो।

लोन ने तीखे लहजे में पूछा कि आखिर वह ‘बम जैसा’ बड़ा एलान कहां गायब हो गया? उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री साहब दिल्ली में सत्ता के गलियारों को हिलाने वाला कोई ठोस कदम उठाएंगे। लेकिन वहां से निकला नतीजा अब तक का सबसे बेजान और बच्चों जैसी जिद का चॉकलेट वाला तरीका था।

उमर अब्दुल्ला के विरोध मार्च की उड़ाई खिल्ली

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की रणनीतियों की खिल्ली उड़ाते हुए लोन ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता दिल्ली के जंतर-मंतर पर सिर्फ धरना देने की तैयारी कर रहे हैं। वे अपनी निजी सुरक्षा टीम, भारी मीडिया कवरेज और देश के चुनिंदा वीआईपी नेताओं के भरोसे केवल एक सलीके से मार्च निकालना चाहते हैं।

पीसी अध्यक्ष सज्जाद लोन ने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला से ज्यादा कम-रचनात्मक इंसान उन्होंने आज तक नहीं देखा है। ऐसी खोखली धमकियों का अंजाम हर कोई पहले से जानता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस इस पूरे ड्रामे का इस्तेमाल केवल जनता का ध्यान अपनी सरकार की नाकामियों से भटकाने के लिए कर रही है।

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की उठी मांग

सज्जाद लोन ने कहा कि बच्चों जैसा बर्ताव बंद करके अब किसी न किसी नेता को गंभीरता दिखानी होगी। ऐसी बचकानी घोषणाओं से बार-बार उसी कश्मीरी जनता का मजाक बनता है, जिसने उन्हें वोट दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को तुरंत जम्मू-कश्मीर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने की कड़ी चुनौती दी।

उन्होंने मांग की कि इस विशेष सत्र में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए एक औपचारिक और मजबूत प्रस्ताव पारित होना चाहिए। इस आधिकारिक सरकारी प्रस्ताव को संसद और देश के सभी मुख्यमंत्रियों को भेजा जाना चाहिए। तभी प्रदेश के लोगों की वास्तविक इच्छाएं और लोकतांत्रिक उम्मीदें पूरी हो सकेंगी।

Author: Muzaffar Bhat

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