Pakistan News: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक क्रांतिकारी और प्रगतिशील कदम उठाया है। यहां लगभग 97 साल पुराने औपनिवेशिक कानून में बड़ा संशोधन करते हुए लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 साल तय कर दी गई है। अब इस निर्धारित उम्र से कम में शादी करना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा। इससे पहले कानूनन लड़कियों की शादी की उम्र केवल 16 वर्ष थी, जबकि लड़कों के लिए यह 18 वर्ष निर्धारित थी।
मरियम नवाज सरकार का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री मरियम नवाज के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने इस सप्ताह पंजाब विधानसभा में ऐतिहासिक ‘बाल विवाह निषेध विधेयक 2026’ पेश किया। सदन ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को बहुमत के साथ पारित कर दिया है। इस नए कानून का उद्देश्य समाज में जड़ें जमा चुकी बाल विवाह की कुप्रथा को जड़ से खत्म करना है। सरकार का मानना है कि इस कानून से लड़कियों को अपनी शिक्षा पूरी करने और शारीरिक रूप से परिपक्व होने का पर्याप्त अवसर प्राप्त होगा।
अपराधियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान
नए पारित कानून के तहत, अब पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए 18 साल से कम उम्र में निकाह करना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा। यदि कोई वयस्क व्यक्ति किसी नाबालिग लड़की (18 वर्ष से कम) के साथ विवाह करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। दोषी पाए जाने पर उस व्यक्ति को तीन साल तक के कठोर कारावास की सजा और पांच लाख पाकिस्तानी रुपये तक के भारी जुर्माने से दंडित करने का सख्त प्रावधान किया गया है।
माता-पिता और रजिस्ट्रार पर भी गिरेगी गाज
यह कानून केवल दूल्हा-दुल्हन तक सीमित नहीं है, बल्कि इस प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति को जवाबदेह बनाता है। यदि माता-पिता या अभिभावक बाल विवाह को बढ़ावा देते हैं या इसे रोकने में विफल रहते हैं, तो उन्हें भी तीन साल की कठोर जेल और पांच लाख रुपये जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा, जो निकाह रजिस्ट्रार ऐसे गैर-कानूनी विवाहों को पंजीकृत करेंगे, उन्हें एक साल की जेल और एक लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना देना होगा। प्रशासन अब इस पर कड़ी नजर रखेगा।


