Weather News: प्रशांत महासागर में विकसित होने वाली बेहद संवेदनशील जलवायु घटना ‘अल नीनो’ का एक नया और खतरनाक दौर शुरू हो गया है। इसके दस्तक देते ही संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठित संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है।
एफएओ ने साफ किया है कि अल नीनो के इस नए दौर का भारत सहित एशिया के कई प्रमुख देशों की कृषि व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर बेहद व्यापक और नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से भारत में इस साल मानसूनी बारिश काफी कमजोर पड़ने की गंभीर आशंका जताई गई है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार मानसूनी बारिश के कमजोर होने से भारत में धान और मक्का जैसी पूरी तरह वर्षा आधारित खरीफ फसलों का कुल उत्पादन बहुत बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इससे आगामी दिनों में देश के भीतर खाद्यान्न संकट गहराने की पूरी आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव से भारत के अधिकांश कृषि प्रधान हिस्सों में इस बार सामान्य से काफी कम वर्षा होगी। बारिश न होने से खेतों में फसलों के लिए जरूरी नमी में भारी कमी आएगी, जिससे पौधों के बढ़ने के महत्वपूर्ण चरणों में उत्पादन पर सीधा दबाव बढ़ेगा।
वैश्विक बाजारों में आसमान छू सकती हैं खाद्यान्न की कीमतें
संयुक्त राष्ट्र की इस वैश्विक एजेंसी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कहा है कि अल नीनो का यह जानलेवा प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका बहुत बड़ा और सीधा असर अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजारों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
अनाज उत्पादन में बड़ी कमी आने से दुनिया भर में खाद्यान्न की आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। ऐसी स्थिति में भारत जैसे बड़े कृषि प्रधान देशों सहित कई अन्य छोटे देशों को भी खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए बाहरी आयात पर बहुत अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।
भारत समेत इन 9 देशों पर मंडरा रहा है भीषण सूखे का संकट
एफएओ का यह चौंकाने वाला विश्लेषण पिछले 41 वर्षों की उपग्रह तस्वीरों और जलवायु संबंधी जटिल आंकड़ों पर पूरी तरह आधारित है। इस रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि भारत, पाकिस्तान, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते में सूखे का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
इन सभी क्षेत्रों में पूरी तरह खेती-किसानी पर निर्भर रहने वाले करोड़ों लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा दांव पर लग गई है। रिपोर्ट में साल 2015-16 के अल नीनो का बड़ा उदाहरण देते हुए बताया गया है कि उस दौरान भारत में मक्का उत्पादन में चार प्रतिशत और धान में एक प्रतिशत की गिरावट आई थी।
पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर
एफएओ के वरिष्ठ प्राकृतिक संसाधन अधिकारी जॉर्ज अल्वार-बेल्ट्रान ने कहा कि कम मानसूनी बारिश का सबसे पहला और सीधा आर्थिक नुकसान देश के गरीब किसानों को उठाना पड़ता है। मुख्य फसलें पूरी तरह खराब होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी गहरे संकट में आ जाती है।
उन्होंने दुनिया को सचेत करते हुए कहा कि मौजूदा अल नीनो पहले के सभी दौर के मुकाबले बहुत अधिक गंभीर और विनाशकारी साबित हो सकता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि वैश्विक तापमान पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है और कई देश पहले से ही खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
Author: Shilla Bhatia


