World News: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पाने के लिए भारत ने अब तक का सबसे कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है। भारत ने सुरक्षा परिषद में बुनियादी सुधारों के लिए तैयार किए गए हालिया ‘एलिमेंट्स पेपर’ की तीखी आलोचना की है। इस कदम से वैश्विक राजनीति में भारी हलचल मच गई है।
इस गंभीर मामले में भारत का साफ कहना है कि यह नया दस्तावेज पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। इसमें सदस्य देशों की राय को गलत तरीके से पेश किया गया है। प्रस्ताव में स्थायी सीटों को बढ़ाने के भारी वैश्विक समर्थन को जानबूझकर छिपाने की नाकाम कोशिश की गई है।
शीत युद्ध के जमाने का पुराना ढांचा बदलने की मांग
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने सोमवार को इस महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत का मजबूत पक्ष रखा। इसके साथ ही उन्होंने इस भेदभावपूर्ण सरकारी दस्तावेज के खिलाफ बेहद कड़े और सीधे सवाल खड़े किए हैं।
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को आज के आधुनिक दौर में ‘शीत युद्ध’ के जमाने का एक पुराना ढांचा माना जाता है। यह आज भी साल 1945 की दुनिया के पुराने समीकरणों के हिसाब से काम कर रहा है। इसके केवल पांच स्थायी सदस्यों के पास ही वीटो पावर सुरक्षित है।
आलोचकों का कहना है कि यह वीटो पावर आज की जमीनी सच्चाई और विकासशील देशों की आवाज को दबाती है। ऐसे में भारत अब जापान, जर्मनी और ब्राजील के ‘जी4 ग्रुप’ के साथ आ गया है। ये सभी देश सालों से खुद के लिए स्थायी सदस्यता मांग रहे हैं।
बहुमत को कम आंकने की चाल पर भारत की कड़ी आपत्ति
राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने इस नए पेपर पर कई बड़े मोर्चों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कम समय देने का हवाला देते हुए कहा कि यह पेपर 10 जून को जारी हुआ। इसके बाद सदस्य देशों को जवाब देने के लिए महज दो वर्किंग डे का समय मिला।
भारत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि दुनिया के ज्यादातर देश सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटें बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसके बावजूद इस पेपर में इस भारी बहुमत को जानबूझकर ‘कुछ देशों का समर्थन’ कहकर बेहद हल्का और कमजोर कर दिया गया।
क्षेत्रीय सीटों का प्रस्ताव खारिज और अब सिर्फ काम की बात
इसके साथ ही पर्वथानेनी का कहना है कि इस सरकारी पेपर में इस्तेमाल किए गए शब्द और परिभाषाएं बिल्कुल साफ नहीं हैं। इन्हें अपनी मर्जी से तोड़-मरोड़ कर लिखा गया है। पेपर में स्थायी सदस्यता के लिए ‘फिक्स्ड रीजनल सीट्स’ का एक नया प्रस्ताव दिया गया था।
भारत ने इस क्षेत्रीय सीट वाले विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत का स्पष्ट कहना है कि इससे वास्तविक स्थायित्व नहीं आएगा। यह छोटे विकासशील देशों के हितों को भी नुकसान पहुंचाएगा। अब केवल बैठकों और निरर्थक चर्चाओं का दौर तुरंत बंद होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र की 80वीं सालगिरह पर आर-पार के मूड में भारत
भारत ने मांग की है कि सुरक्षा परिषद के सुधारों के लिए अब एक औपचारिक ‘नेगोशिएटिंग टेक्स्ट’ तैयार किया जाए। इस पर सभी देश सीधे तौर पर बातचीत कर सकें। इसके साथ ही इस ऐतिहासिक काम को पूरा करने की एक निश्चित समय सीमा भी तय की जाए।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के अब 80 साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे समय में इस वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोमवार की बैठक से साफ हो गया है कि भारत अब किसी टालमटोल को स्वीकार नहीं करेगा।
Author: Pallavi Sharma


