World News: ताइवान में भारतीयों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले पोस्टर सोशल मीडिया और सड़कों पर नजर आ रहे हैं। इन पोस्टरों में भारतीय ध्वज को उल्टा दिखाया गया है। एक पगड़ीधारी व्यक्ति की तस्वीर के साथ ‘इंडियंस डोंट कम हियर’ लिखा है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और चिंता को काफी बढ़ा दिया है।
ताइवान में क्यों गहराया भारतीय विरोधी चुनावी मुद्दा
ताइवान में यह नस्लीय विवाद अब एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। साल 2023 में भी वहां भारतीय श्रमिकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। सोशल मीडिया पर भारतीयों को रोकने के लिए लगातार नफरती अभियान चलाए जा रहे हैं। स्थानीय नेता इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश में जुटे हैं।
मजदूरों की भारी किल्लत और भारत पर निर्भरता
ताइवान इस समय जनसांख्यिकीय संकट से बुरी तरह जूझ रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया की तरह ताइवान में भी जन्म दर तेजी से गिरी है। वहां फैक्ट्रियों और विकास कार्यों के लिए कामकाजी युवाओं की भारी कमी हो गई है। इसी वजह से ताइवान भारत से करीब एक लाख स्किल्ड वर्कर्स बुलाने की बड़ी तैयारी कर रहा था।
स्किन कलर पर ताइवानी मंत्री के बयान से विवाद
ताइवान के एक वरिष्ठ मंत्री ने पहले विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ताइवान को सिर्फ उत्तर-पूर्वी भारत के श्रमिक चाहिए। इसका कारण उन्होंने यह बताया कि उनका स्किन कलर ताइवानी लोगों से मिलता है। इस रंगभेदी बयान ने आग में घी का काम किया और कूटनीतिक स्तर पर नाराजगी बढ़ा दी।
चीन के बढ़ते खतरे के बीच ताइवान की रणनीतिक भूल
ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने इस नफरती अभियान की कड़े शब्दों में आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय राजनेता सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसा घटिया काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के सैन्य दबाव के बीच भारत जैसे मजबूत कूटनीतिक सहयोगी के नागरिकों को निशाना बनाना ताइवान की बड़ी रणनीतिक भूल है।
Author: Pallavi Sharma

