International News: ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य तनाव को देखते हुए चीन ने दुनिया को आगाह किया है। बीजिंग ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में भड़की यह आग किसी के भी हित में नहीं है। मंगलवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से तुरंत शत्रुता त्यागने और शांतिपूर्ण बातचीत की मेज पर लौटने की पुरजोर अपील की है।
ईरान के बिजली संयंत्रों पर अमेरिकी हमले की खबरों के बीच चीन का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि बीजिंग इस संकट के व्यापक परिणामों को लेकर बेहद चिंतित है। चीन के मुताबिक, लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष केवल तबाही लाएगा और बातचीत ही इसका एकमात्र समाधान है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि युद्ध का असर केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेगा। यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। बीजिंग ने चेतावनी दी कि यदि तनाव और बढ़ा तो इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, वैश्विक वित्त और व्यापारिक परिवहन को सीधा नुकसान पहुंचेगा।
सैन्य बल समाधान नहीं, पैदा होगी नई नफरत
चीनी प्रवक्ता ने बल प्रयोग के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि सैन्य कार्रवाई अक्सर उल्टे परिणाम देती है। सशस्त्र टकराव से पुरानी समस्याएं सुलझने के बजाय नई नफरत जन्म लेती है। चीन ने सभी संबंधित देशों से संयम बरतने और सैन्य अभियानों पर तत्काल विराम लगाने का आग्रह किया है।
चाइना डेली की रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग का मानना है कि मध्य पूर्व की अस्थिरता दुनिया के साझा हितों को चोट पहुँचा रही है। चीन ने शुक्रवार को ही संकेत दे दिए थे कि यह संघर्ष तेजी से फैल रहा है। अब बीजिंग खुद को एक राजनयिक मध्यस्थ के रूप में आगे कर रहा है ताकि सैन्य-मुक्त समाधान निकल सके।
प्रवक्ता लिन ने भरोसा दिलाया कि चीन युद्धविराम के लिए अपनी तरफ से हर संभव मध्यस्थता करेगा। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति लौटनी चाहिए। चीन की यह सक्रियता दिखाती है कि वैश्विक शक्तियां अब इस टकराव के आर्थिक और मानवीय परिणामों से डरने लगी हैं।
राजनयिक मध्यस्थता ही आखिरी उम्मीद
चीन ने दोहराया कि वह शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी रखेगा। प्रवक्ता ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष स्थिति की गंभीरता को समझेंगे। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान चीन की इस अपील को तवज्जो देंगे।
बता दें कि 20 मार्च को भी चीन ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी। उस समय भी अंतरराष्ट्रीय परिवहन और ऊर्जा संकट को सबसे बड़ा खतरा बताया गया था। मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि कूटनीति ही इस महायुद्ध को टालने का अंतिम रास्ता बची है।
चीन का यह रुख वैश्विक बाजार में स्थिरता लाने की एक कोशिश भी माना जा रहा है। सैन्य टकराव की आशंका मात्र से ही दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में शांति की कोई भी पहल दुनिया के लिए राहत की खबर बन सकती है।


