Delhi News: आम आदमी पार्टी छोड़ने के ठीक बाद सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल गई है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने राघव चड्ढा को याचिका समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह बड़ा फैसला उनके बीजेपी में शामिल होने के कुछ ही हफ्तों बाद लिया गया है।
राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह नई समिति 20 मई से पूरी तरह प्रभावी हो गई है। इस नवगठित समिति में कुल 10 सदस्यों को जगह मिली है, जिसकी कमान अब राघव चड्ढा संभालेंगे। यह जिम्मेदारी मिलने के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा बहुत तेज हो गई है।
जानिए आखिर संसद की याचिका समिति क्या काम करती है?
संसद की यह विशेष समिति सीधे तौर पर आम जनता की गंभीर शिकायतों और जनहित से जुड़े मामलों की गहन जांच करती है। जब किसी आम नागरिक की समस्या का समाधान सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था से नहीं होता, तब वह इस समिति के माध्यम से सीधे संसद तक अपनी बात पहुंचा सकता है।
यह महत्वपूर्ण समिति देश के नागरिकों और संसद के बीच एक बेहद मजबूत औपचारिक पुल की तरह काम करती है। इसीलिए इस प्रतिष्ठित समिति का अध्यक्ष बनना सिर्फ एक औपचारिक पद नहीं है। राजनीतिक जानकार इसे सीधे तौर पर बड़े राजनीतिक भरोसे और बढ़ते संसदीय प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं।
इस नई समिति में राघव चड्ढा के अलावा कई अन्य दिग्गज सांसदों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इनमें हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मस्थान राव यादव बीधा, जेबी मेथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रवंगवरा नारजारी, मयंक कुमार नायक और संतोष कुमार के नाम प्रमुख हैं।
राघव चड्ढा ने क्यों छोड़ी थी आम आदमी पार्टी?
राघव चड्ढा पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद चुने गए थे। लेकिन उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को अचानक पार्टी छोड़ दी थी। वह अकेले बीजेपी में नहीं गए, बल्कि अपने साथ दो-तिहाई से ज्यादा राज्यसभा सांसदों को लेकर बीजेपी का दामन थामने पहुंचे थे।
उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता जैसे बड़े नेता भी बीजेपी में शामिल हुए थे। चड्ढा ने कहा था कि वह गलत पार्टी में सही आदमी थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक चुकी है।
बीजेपी ने राघव चड्ढा को यह जिम्मेदारी देकर साफ संकेत दिया है कि वह उनके संसदीय अनुभव और मीडिया कौशल का बड़ा फायदा उठाना चाहती है। इसके साथ ही मेनका गुरुस्वामी को कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक समिति का सदस्य और लोकसभा सांसद अरविंद सावंत को भी इसी संयुक्त समिति में शामिल किया गया है।
Author: Harikarishan Sharma

