मलिहाबादी दशहरी की बाजार में धमाकेदार एंट्री, पहले ही दिन बिक गया 1000 टन से ज्यादा आम

Lucknow News: दुनिया भर में अपनी बेमिसाल मिठास और लाजवाब जायके के लिए मशहूर ‘दशहरी’ आम का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। सोमवार को दशहरी ने फल मंडियों में धमाकेदार दस्तक दे दी है। मलिहाबाद की प्रसिद्ध आम मंडी में पहले ही दिन एक हजार टन से अधिक दशहरी आम का रिकॉर्ड कारोबार दर्ज किया गया।

दशहरी के कद्रदान सिर्फ नवाबों के शहर लखनऊ में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मौजूद हैं। यही वजह है कि इसकी मिठास को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए मुंबई, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों से भारी तादाद में थोक कारोबारी और आढ़ती मलिहाबाद मंडी पहुंचे हैं।

सीजन के पहले ही दिन जिस बड़े पैमाने पर व्यापार हुआ है, उसे देखकर स्थानीय बागवान और किसान बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं। फल कारोबारियों का साफ कहना है कि इस बार दशहरी आम अपने बेहतरीन स्वाद के साथ-साथ बागवानों के लिए बंपर मुनाफा भी लेकर आने वाला है।

मलिहाबाद की आर्थिकी की मुख्य धुरी है दशहरी आम

दशहरी आम का निर्यात भारत के अलावा दुनिया के कई बड़े देशों में किया जाता है। यह खास आम सिर्फ अपनी सुगंध के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह मलिहाबाद और उसके आसपास के पूरे ग्रामीण इलाके की आर्थिकी की मुख्य धुरी है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका चलती है।

रविवार को इलाके में हुई अचानक बारिश के कारण मलिहाबाद मंडी में आम की आवक थोड़ी सीमित जरूर रही। इसके बावजूद खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। हालांकि, शुरुआती कीमतों को लेकर बागवान पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन आढ़तियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में रेट बढ़ेंगे।

मंडी के आढ़ती सुनील गुप्ता ने बताया कि इस बार बेहतरीन ‘बैगिंग’ वाले प्रीमियम आम की बिक्री 60 रुपये से लेकर 80 रुपये प्रति किलो तक हुई है। यह बैगिंग वाला आम बेहद चमकदार, रेशा रहित और आकर्षक होता है, जिसके चलते यह साधारण आम की तुलना में काफी महंगे दामों पर बिकता है।

जानिए आखिर क्यों इतना ज्यादा खास है दशहरी आम?

दशहरी आम का इतिहास करीब दो सौ वर्ष पुराना है। सबसे पहले काकोरी के ‘दशहरी’ गांव में इस अनोखे आम का पेड़ मिला था, जिसकी मिठास सबसे अलग थी। इसी गांव के नाम पर इसका नाम ‘दशहरी’ पड़ा। काकोरी में आज भी वह ऐतिहासिक पेड़ सुरक्षित मौजूद है, जिसे सरकार ने विशेष दर्जा दिया है।

यह आम अपने विशिष्ट लंबे आकार, पतले छिलके और हल्के सुनहरे हरे रंग के लिए पहचाना जाता है। इसका गूदा बेहद रसीला और मुलायम होता है। मलिहाबाद में करीब डेढ़ सौ हेक्टेयर में फैली आम की खास फलपट्टी और यहां की उपजाऊ मिट्टी ही इसे यह अद्वितीय सुगंध और बेहतरीन स्वाद देती है।

शानदार स्वाद के कारण इस भारतीय आम की मांग खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा रहती है। दुबई और कुवैत में दशहरी आम के लाखों शौकीन मौजूद हैं। इसके अलावा हर साल भारी मात्रा में इस खास आम का निर्यात कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।

Author: Rajesh Kumar

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