Delhi News: भारत में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और पानी की किल्लत को दूर करने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। अब देश में पानी की बूंद-बूंद का हिसाब रखने के लिए सेटेलाइट टेक्नोलॉजी (उपग्रह प्रौद्योगिकी) का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय और इसरो (ISRO) के बीच सोमवार को एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है।
इस बड़े समझौते के साथ ही जल शक्ति मंत्रालय ने देश में एक नए ‘जल अनुसंधान मिशन’ की भी शुरुआत कर दी है। इसके तहत पानी को बचाने और उस पर रिसर्च करने वाली प्रति परियोजना (प्रोजेक्ट) को सरकार की तरफ से 20 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय मदद दी जाएगी। सरकार ने देशभर में दो करोड़ जल-संरक्षण संरचनाएं बनाने का महा-लक्ष्य भी तय किया है।
यह महत्वपूर्ण समझौता दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान हुआ। इस साझेदारी के तहत जल संसाधन विभाग और इसरो मिलकर जलाशय निगरानी, नदी-प्रवाह विश्लेषण, उपग्रह आधारित पानी की शुद्धता की जांच और जलाशयों में प्लास्टिक कचरे के अध्ययन समेत 24 प्रमुख क्षेत्रों पर काम करेंगे।
विकसित भारत के लिए जल सुरक्षा है सबसे जरूरी
राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में जल सुरक्षा होना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पानी से जुड़ी हर चुनौती का समाधान आधुनिक तकनीक, नए नवाचार (इनोवेशन), पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के जरिए ही किया जा सकता है।
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान की मदद से अब जमीन के नीचे मौजूद पानी (भूजल) का सटीक आकलन, जल संसाधनों की चौबीसों घंटे निगरानी और बाढ़ का पहले ही पूर्वानुमान लगाने जैसे बेहद संवेदनशील और जरूरी क्षेत्रों में बड़ी मदद मिलेगी, जिससे आपदाओं से बचा जा सकेगा।
जल शक्ति मंत्री ने इसके साथ ही ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण का भी भव्य शुभारंभ किया। इसके तहत जून 2026 से मई 2027 के बीच पूरे देश में दो करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे बनाए जाएंगे। सरकार इस अभियान के माध्यम से पानी बचाने के लिए आम जनता को सीधे जोड़ने का प्रयास कर रही है।
पुराने रिकॉर्ड टूटे, अब स्टार्टअप्स और MSME को खुला न्योता
केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि इस अभियान के पहले चरण में 10 लाख के मुकाबले रिकॉर्ड 27.5 लाख जल ढांचे बने थे। वहीं, जून 2025 में शुरू हुए दूसरे चरण में एक करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1.5 करोड़ ढांचे तैयार किए गए। इस सफलता को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘JSJB-कैच द रेन’ पोर्टल भी लॉन्च किया है।
इसके साथ ही जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ने मिलकर ‘एमएएचए (MAHA)-वाटर प्रोग्राम’ शुरू किया है। इस प्रोग्राम के तहत देश के विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप्स को जोड़कर बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम होगा। ‘भारत वाटर इनोवेशन नेटवर्क’ के जरिए युवाओं और एमएसएमई (MSME) को निवेश के लिए खुला आमंत्रण दिया गया है।
इस मौके पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (स्पेस इकोनॉमी) लगभग नौ अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। आने वाले कुछ ही सालों में इसमें पांच से छह गुना की बंपर बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है।
Author: Gaurav Malhotra


