क्या जरूरत से ज्यादा पानी पीना बन सकता है जानलेवा? जानिए क्या है ‘वॉटर इन्टॉक्सिकेशन’ और इसके नुकसान

Health News: अच्छी सेहत और तंदुरुस्ती के लिए अक्सर खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है, खासकर भीषण गर्मी के मौसम में। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही जीवनदायी पानी हमारी सेहत को गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकता है? जरूरत से ज्यादा पानी पीना शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है।

जब आप अपने शरीर की सामान्य आवश्यकता से बहुत अधिक मात्रा में पानी पी लेते हैं, तो यह एक बेहद गंभीर स्थिति को जन्म देता है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस जानलेवा समस्या को ‘वॉटर इन्टॉक्सिकेशन’ या ओवरहाइड्रेशन कहा जाता है। आइए समझते हैं कि अत्यधिक पानी पीना कैसे नुकसानदेह है।

वॉटर इन्टॉक्सिकेशन एक ऐसी शारीरिक स्थिति है, जब आपके शरीर में उसकी क्षमता से कहीं ज्यादा पानी इकट्ठा हो जाता है। आमतौर पर, हमारा शरीर पसीने या यूरिन के जरिए अतिरिक्त पानी को बाहर निकाल देता है। लेकिन पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होने पर शरीर में खतरनाक इंबैलेंस पैदा हो जाता है।

कम समय में ज्यादा पानी पीने से खून पर पड़ता है सीधा असर

जब आप बहुत कम समय के भीतर अत्यधिक मात्रा में पानी गटक लेते हैं, तो इसका सीधा और घातक असर आपके खून और सेल्स पर पड़ता है। जरूरत से ज्यादा पानी आपके खून को पूरी तरह पतला कर देता है। इसके कारण शरीर में मौजूद जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा तेजी से घटने लगती है।

इस स्थिति में सबसे ज्यादा कमी सोडियम के स्तर में आती है। खून में सोडियम का स्तर सामान्य से कम होने की इस बीमारी को ‘हाइपोनेट्रेमिया’ कहा जाता है। सोडियम हमारे शरीर में सेल्स के अंदर और बाहर पानी के संतुलन को पूरी तरह से बनाए रखने का महत्वपूर्ण काम करता है।

जब खून में सोडियम का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो पानी संतुलन बनाने के लिए शरीर की कोशिकाओं के अंदर प्रवेश करने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर की विभिन्न सेल्स पानी सोखकर धीरे-धीरे फूलने लगती हैं, जो आगे चलकर शरीर के लिए बेहद घातक बनता है।

मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन आना सबसे ज्यादा खतरनाक

शरीर के अन्य अंगों की तुलना में दिमाग की कोशिकाओं (ब्रैन सेल्स) में सूजन आना सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। पानी की अधिक मात्रा के कारण जब दिमाग के सेल्स में सूजन आती है, तो खोपड़ी के अंदर का आंतरिक दबाव अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

खोपड़ी का यह बढ़ा हुआ दबाव दिमाग के काम करने के प्राकृतिक तरीके को सीधे प्रभावित करता है। इसके कारण व्यक्ति की मानसिक स्थिति तेजी से बिगड़ने लगती है। मरीज के सामान्य व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगता है, जिससे उसके होश और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है।

स्थिति बिगड़ने पर व्यक्ति अपने शरीर के मूवमेंट पर से पूरी तरह कंट्रोल खोने लगता है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर इस गंभीर स्थिति पर समय रहते तुरंत ध्यान न दिया जाए, तो वॉटर इन्टॉक्सिकेशन किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के लिए बेहद दर्दनाक और जानलेवा भी साबित हो सकता है।

Author: Asha Thakur

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