UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंटने वाले पोषाहार वितरण में बड़ा बदलाव किया है. अब हर पैकेट की डिजिटल निगरानी होगी. राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन पैकेटों पर बार कोड लगाएगा. इसके साथ ही अब फेस रीडिंग तकनीक से ही लाभार्थियों को राशन बांटा जाएगा.
बार कोड स्कैन करते ही स्टॉक में दर्ज होगी एंट्री
नई व्यवस्था के तहत फर्म से तैयार होने वाले हर पैकेट पर एक विशेष बार कोड अंकित रहेगा. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्र पर पोषाहार पहुंचते ही उसे अपने मोबाइल से स्कैन करेंगी. इससे किस दिन और किस समय किस केंद्र पर कितना राशन पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी तुरंत फीड हो जाएगी.
जनपद के 3,252 आंगनबाड़ी केंद्रों में एक लाख से अधिक बच्चे नामांकित हैं. इन केंद्रों पर छह माह से तीन साल तक के बच्चों को आटा, बेसन और मीठा हलवा दिया जाता है. वहीं तीन से छह साल तक के बच्चों को बर्फी, दलिया और मूंग दाल की स्वादिष्ट खिचड़ी मिलती है.
गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को मिलता है विशेष राशन
योजना के तहत गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को विशेष पोषाहार मिलता है. उन्हें नियमित रूप से आटा, बेसन, सोया बर्फी और दलिया वितरित किया जाता है. इसके अतिरिक्त छह माह से तीन साल तक के अति कुपोषित बच्चों के लिए ऊर्जा युक्त हलवा देने का विशेष प्रविधान है.
बाजारों में इस सरकारी पोषाहार की अवैध बिक्री रोकने के लिए शासन ने 10 दिन पहले ही नया मोबाइल ऐप जारी किया है. नेफेड और टीएचआर प्लांट से सीधे केंद्रों पर आपूर्ति की जाएगी. इससे सीडीपीओ कार्यालय और गोदामों के चक्कर काटने में बर्बाद होने वाला समय बचेगा.
ईएलएमडी ऐप से रुकेगी गड़बड़ी, आएगी पूरी पारदर्शिता
पहले गोदामों में राशन डंप रहने से केंद्रों पर कम पोषाहार पहुंचने की शिकायतें मिलती थीं. अब नेफेड ने ईएलएमडी ऐप जारी किया है. इसे सभी कार्यकर्ताओं के मोबाइल में इंस्टॉल कराया जा रहा है. विभागीय अधिकारी भी इस ऐप के जरिए हर पैकेट की लाइव लोकेशन देख सकेंगे.
अक्सर जांच में यह पता नहीं चल पाता था कि पकड़ा गया पैकेट किस केंद्र का है. अब बार कोड स्कैन करते ही तुरंत केंद्र का नाम सामने आ जाएगा. अधिकारियों का दावा है कि आधार आधारित चेहरा प्रमाणीकरण (फेस रीडिंग) से पोषाहार वितरण में पूरी पारदर्शिता आएगी.
Author: Ajay Mishra


