Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में भू-माफियाओं और साइबर अपराधियों ने मिलकर एक ऐसा खतरनाक नेटवर्क तैयार कर लिया है, जिसने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पटना पुलिस और राजस्व अधिकारियों की संयुक्त जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में जमीन से जुड़े अपराधों में 136 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पटना में होने वाली ज्यादातर हत्याओं के पीछे जमीन विवाद ही मुख्य वजह बनकर सामने आ रहा है। भू-माफिया इस समय सबसे ज्यादा उन संपत्तियों को अपना निशाना बना रहे हैं, जिनके मूल मालिकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा अकेले रह रहे बुजुर्ग और राज्य से बाहर रहने वाले प्रवासी उनके सॉफ्ट टारगेट हैं।
पटना में अवैध रजिस्ट्री और जमीन फर्जीवाड़े का ग्राफ हर साल तेजी से ऊपर भागा है। साल 2021 में जहां महज 38 मामले सामने आए थे, वहीं साल 2025 में यह संख्या बढ़कर 90 तक पहुंच गई। थानों, जनता दरबारों और अदालतों को मिलाकर पिछले पांच वर्षों की इस अवधि में कुल 312 आधिकारिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
मृतकों की संपत्ति पर अपराधियों का सबसे बड़ा हमला
भू-माफियाओं के लिए सबसे आसान रास्ता उन जमीनों को हड़पना साबित हो रहा है, जिनके मालिकों की मृत्यु हो चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में मृतकों की जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े के 11 मामले थे, जो साल 2025 में बढ़कर 39 हो गए। पांच सालों में इस श्रेणी में 254 प्रतिशत का रिकॉर्ड उछाल आया है।
कुल दर्ज 312 मामलों में से 118 मामले सीधे तौर पर मृत व्यक्तियों की जमीन हड़पने से संबंधित हैं। इसमें अपराधी जाली मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने और नकली वारिस खड़े करने का गंदा खेल खेल रहे हैं। सुरक्षा की कमी के कारण बिहार से बाहर रहने वाले प्रवासी और अकेले रहने वाले बुजुर्ग अपराधियों के लिए बड़ा अवसर बन रहे हैं।
प्रवासी परिवारों से जुड़े कुल 74 मामले दर्ज किए गए हैं, जो दूसरे राज्यों में रहने के कारण अपनी जमीन की देखरेख नहीं कर पाते थे। वहीं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग पीड़ितों के मामलों में पांच साल के भीतर 177 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, जिनकी कुल मामलों में हिस्सेदारी 27.5 प्रतिशत रही।
फर्जी दस्तावेजों और ऑनलाइन डेटा का हो रहा खेल
जमीन सर्वे, ऑनलाइन खाता-खेसरा और नगर निगम के टैक्स रिकॉर्ड का डेटा अब अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन रहा है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के मुताबिक, साइबर अपराधियों और भू-माफियाओं में सीधा तालमेल है। अपराधियों द्वारा डेटा लीक और साइबर सेंधमारी के जरिए ही कीमती जमीनों की पूरी जानकारी निकाली जाती है।
रजिस्ट्री के खेल में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में 47 मामलों में जाली पहचान पत्रों और 29 मामलों में नकली पैन कार्ड का इस्तेमाल कर अवैध रजिस्ट्री कराई गई। कुल 63 मामलों में जाली पावर ऑफ अटॉर्नी का सहारा लेकर जमीन ट्रांसफर करने की कोशिश की गई।
भू-माफिया अब सिम कार्ड स्वाइप करने और मोबाइल नंबर दोबारा एक्टिव कर ओटीपी हासिल करने जैसे साइबर पैंतरे भी अपना रहे हैं। ऐसे तकनीकी फर्जीवाड़े के मामले साल 2021 में महज पांच थे, जो साल 2025 में बढ़कर 26 हो गए। शहर के बाहरी अंचलों में खाली पड़े प्लाटों पर अवैध कब्जे के भी 52 मामले सामने आए हैं।
कंकड़बाग, दानापुर और बिहटा बने जमीन फर्जीवाड़े के हॉटस्पॉट
पटना के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में जमीनों की आसमान छूती कीमतों ने अपराधियों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कंकड़बाग इलाका 41 मामलों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद दानापुर में 38 और बिहटा में 34 मामले दर्ज किए गए हैं।
इसके साथ ही फुलवारीशरीफ में 29 मामले और संपतचक में 24 मामले सामने आए हैं, जो इस अवैध नेटवर्क के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। दीघा इलाके में भी 21 मामले दर्ज हुए हैं। प्रशासन अब इन इलाकों के भूमि रिकॉर्ड और हाल ही में हुई रजिस्ट्रियों की बारीकी से दोबारा जांच करने की योजना बना रहा है।
Author: Raj Thakur


