Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिसके जिम्मे सुरक्षा व्यवस्था का पूरा दारोमदार है, अब उसी पुलिस ने कुर्सी रोड पर स्थित इसरो परिसर की सुरक्षा पर गहरे खतरे की आशंका जताई है।
दरअसल, इसरो की बाहरी सुरक्षा दीवार से सटकर लगने वाली अवैध फल और सब्जी मंडी को इस खतरे की मुख्य वजह बताया गया है। पिछले कई सालों से यह अवैध मंडी नगर निगम और स्थानीय पुलिस के बीच बड़े विवाद का कारण बनी हुई है। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी इसे पूरी तरह हटाया नहीं जा सका है।
सरकारी नियमों के अनुसार, एक बार अतिक्रमण हटने के बाद वहां दोबारा अवैध कब्जा न होने देने की जिम्मेदारी संबंधित थाने की होती है। लेकिन यहां पुलिस खुद ही बेबस नजर आ रही है और नगर निगम को गुहार लगा रही है। इससे देश के इस बेहद संवेदनशील संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आतंकी संगठनों के निशाने पर है लखनऊ का इसरो केंद्र
इसरो की सुरक्षा को लेकर खुफिया एजेंसियों से पहले भी कई गंभीर इनपुट मिल चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, देश के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकी संगठनों के निशाने पर बेंगलुरु मुख्यालय के साथ-साथ लखनऊ की यह महत्वपूर्ण इसरो शाखा भी प्रमुख रूप से शामिल है।
साल 2007 में रामपुर के सीआरपीएफ (CRPF) कैंप पर हमला करने वाले आतंकियों ने पूछताछ में खुलासा किया था कि उनके निशाने पर लखनऊ का इसरो परिसर भी था। इसके बाद साल 2018 में स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) ने भी यहां आतंकी घुसपैठ की आशंका जताते हुए दीवार से सटे अतिक्रमण को तुरंत हटाने की सिफारिश की थी।
इन तमाम गंभीर चेतावनियों के बावजूद प्रशासन इस संवेदनशील मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर नजर नहीं आ रहा है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में इसरो प्रबंधन की ओर से भी इस अवैध बाजार को पूरी तरह से साफ करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखित पत्र भेजे जा चुके हैं।
पुलिस और नगर निगम में छिड़ी ‘लेटर वॉर’
इस पूरे मामले का खुलासा गुडंबा थाने के उपनिरीक्षक शिव शंकर के एक पत्र से हुआ है। उन्होंने बीती 20 मई को नगर आयुक्त को लिखे पत्र में साफ कहा है कि इसरो परिसर की दीवार के पास लगने वाली अवैध मंडी के कारण संस्थान की सुरक्षा में कभी भी कोई बड़ी चूक हो सकती है।
उपनिरीक्षक ने पत्र में लिखा है कि देश की आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर इस सड़क से अवैध मंडी को तत्काल हटाना बेहद जरूरी है। इससे पहले 26 अप्रैल को भी इसके लिए पत्र भेजा गया था। दूसरी तरफ, नगर निगम और पुलिस इस पूरे मामले पर जिम्मेदारी का ठीकरा एक-दूसरे के पाले में फोड़ रहे हैं।
नगर निगम के जोनल अधिकारी मनोज यादव का कहना है कि बीती 22 और 23 अप्रैल को टेढ़ी पुलिया से लेकर इसरो तक बड़ा अभियान चलाकर अवैध कब्जे हटाए गए थे। उन्होंने कहा कि शासनादेश के मुताबिक, अतिक्रमण हटने के बाद दोबारा दुकानें न सजने देने की कानूनी जिम्मेदारी पूरी तरह से गुडंबा थाने की पुलिस की है।
Author: Ajay Mishra


