Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर से सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बेसहारा बुजुर्ग महिला को अपनी पहली पारिवारिक पेंशन के लिए पूरे 47 साल तक भटकना पड़ा। आखिरकार हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद प्रशासन ने बुजुर्ग महिला का हक उन्हें वापस लौटाया है।
यह दर्दनाक कहानी 82 वर्षीय कलावती देवी की है। उनके पति टीटी यादव बदलापुर के एक इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक थे। साल 1979 में सेवाकाल के दौरान ही उनका अचानक निधन हो गया था। नियमों के मुताबिक कलावती देवी को उसी समय से 217 रुपये प्रति माह की पारिवारिक पेंशन मिलनी चाहिए थी।
अज्ञानता और अफसरों की लापरवाही ने छीना हक
कलावती देवी ग्रामीण पृष्ठभूमि से थीं और उन्हें कड़े नियमों की जानकारी नहीं थी। इस वजह से वह समय पर आवेदन नहीं कर सकीं। साल 2024 में जब उनके दामाद को इस अधिकार का पता चला, तो उन्होंने शिक्षा विभाग के चक्कर काटे। मगर अफसरों ने पुराने दस्तावेज न होने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया।
थक-हारकर इस बेबस बुजुर्ग महिला ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दो साल तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अदालत ने शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट के सख्त रुख के बाद वाराणसी के शिक्षा निदेशक ने 20 मई 2026 को पेंशन की फाइल को हरी झंडी दे दी।
इस जीत के पीछे एक बेहद मर्मस्पर्शी मानवीय पहलू भी छिपा है। बेहद गंभीर बीमारियों से जूझ रही कलावती देवी को कुछ समय पहले उनके भाई ने घर से निकाल दिया था। अब उनके नाती अनिल यादव उनकी देखभाल कर रहे हैं। नाती ने बताया कि यह पेंशन नानी के इलाज और सम्मान का सहारा बनेगी।
कलावती देवी को पेंशन की यह राशि भारतीय स्टेट बैंक की बदलापुर शाखा से मिलेगी। विभाग ने अब उनके पिछले 47 वर्षों के बकाया एरियर के भुगतान की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। देर से ही सही, लेकिन कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा फिर मजबूत किया है।
Author: Ajay Mishra


