IIT Mandi Startup Firestriker: अग्निकांड से निपटने के लिए एआई संचालित ड्रोन तकनीक विकसित

Himachal Pradesh News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी के स्टार्टअप ‘सिमहेटेल टेक्नोलॉजीज’ ने आगजनी की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित ड्रोन विकसित किए हैं। ‘फायरस्ट्राइकर’ सीरीज के ये ड्रोन संकरी गलियों और ऊंची इमारतों में मानवीय हस्तक्षेप के बिना आग बुझाने में सक्षम हैं। यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है, जहां दमकल गाड़ियों का पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने आपदा प्रबंधन में लगने वाले समय को कम करने के उद्देश्य से यह नवाचार किया है।

स्वदेशी तकनीक से आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती

आईआईटी मंडी के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (सीएआईआर) के प्रोफेसर डॉ. अमित शुक्ला ने इस डीप-टेक स्टार्टअप की नींव रखी है। उनका मुख्य विजन ऐसी तकनीक का विकास करना है, जो संकट के समय धरातल पर जीवन बचाने में प्रभावी साबित हो सके। सिमहेटेल टेक्नोलॉजीज द्वारा निर्मित यह ड्रोन प्रणाली पूरी तरह स्वदेशी है। इसे भारतीय भौगोलिक परिस्थितियों और शहरी नियोजन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है।

फायरस्ट्राइकर सीरीज: आग बुझाने के दो आधुनिक मॉडल

इस श्रृंखला में दो प्रमुख ड्रोन मॉडल शामिल हैं, जो अलग-अलग परिस्थितियों में कार्य करते हैं। पहला ‘फायरस्ट्राइकर एयरड्रॉप’ ड्रोन है, जिसकी पेलोड क्षमता 10 किलोग्राम तक है। यह ड्रोन प्रभावित क्षेत्र के ऊपर मंडराते हुए विशेष एबीसी (ABC) अग्निशामक गेंदों की सटीक बौछार करता है। ये गेंदें आग के संपर्क में आते ही रसायनों का छिड़काव करती हैं, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है। इसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 15 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जो व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध है।

हाइब्रिड एयरोजेट तकनीक से घंटों तक चलेगा ऑपरेशन

श्रृंखला का दूसरा मॉडल ‘फायरस्ट्राइकर एयरोजेट’ एक हाइब्रिड प्रणाली पर आधारित है। यह ड्रोन न केवल हवा में उड़ सकता है, बल्कि जमीन पर रोबोट की तरह चलने की क्षमता भी रखता है। इसकी भार वहन क्षमता 15 किलोग्राम है और यह निरंतर पानी या फोम का छिड़काव कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ‘टीथर्ड पावर सप्लाई’ है, जो इसे बाहरी बिजली स्रोत से जोड़े रखती है। इसके कारण बैटरी खत्म होने की चिंता के बिना घंटों तक बचाव कार्य जारी रखा जा सकता है।

संकट के शुरुआती समय में ड्रोन की त्वरित प्रतिक्रिया

अग्निशमन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़ी आग को नियंत्रित करने के लिए शुरुआती दो से पांच मिनट का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। संकरी गलियों या भारी ट्रैफिक के कारण दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में अक्सर देरी हो जाती है। सिमहेटेल के ये एआई ड्रोन ऐसी बाधाओं को पार कर महज कुछ ही मिनटों में आग पर प्रहार शुरू कर देते हैं। यह त्वरित प्रतिक्रिया जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

बहुमंजिला इमारतों और कठिन इलाकों में प्रभावी समाधान

ये ड्रोन उन स्थानों पर पहुंचने में सक्षम हैं, जहां पारंपरिक हाइड्रोलिक सीढ़ियां भी नहीं पहुंच पातीं। तेल के कुओं, घने जंगलों या 20वीं मंजिल तक की ऊंची इमारतों में इनका उपयोग बेहद कारगर है। डॉ. अमित शुक्ला के अनुसार, भविष्य का लक्ष्य अग्निकांड के दौरान मानवीय जोखिम को शून्य करना है। इसके लिए इन मशीनों को स्वायत्त रूप से कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। वर्तमान में इन ड्रोनों के पेटेंट के लिए आवेदन किया गया है और उत्पादन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

भारत इनोवेट 2026 में स्टार्टअप को मिली राष्ट्रीय पहचान

सिमहेटेल टेक्नोलॉजीज की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। इस स्टार्टअप को ‘भारत इनोवेट 2026’ कार्यक्रम के लिए चुना गया है। यह मंच देश की सबसे नवीन और प्रभावशाली तकनीकों को प्रदर्शित करने के लिए जाना जाता है। इस चयन से स्पष्ट है कि ड्रोन आधारित अग्निशमन तकनीक आने वाले समय में राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन का एक अनिवार्य हिस्सा बनेगी। सरकार और औद्योगिक इकाइयां इन ड्रोनों को अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल में शामिल करने पर विचार कर रही हैं।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories