Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज विभाग ने स्थानीय निकायों में सामने आए बड़े वित्तीय घोटाले पर कड़ा एक्शन लिया है। स्थानीय निकाय लेखा परीक्षा समिति की बैठक के बाद सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है। अब सरकारी पैसों में हेरफेर करने वाले सभी लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों से दंडात्मक ब्याज के साथ पूरी रिकवरी की जाएगी।
विधानसभा समिति की ताजा समीक्षा में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक पंचायती राज संस्थाओं में कुल 50.68 करोड़ रुपये की भारी रकम वसूली के लिए योग्य पाई गई थी। इस बड़ी राशि में से विभाग अभी तक केवल 2.09 करोड़ रुपये का ही समायोजन या वसूली करने में कामयाब हो सका है।
विभाग की इस ढीली कार्यप्रणाली पर राज्य सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रशासन ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि जिस भी स्तर पर बजट का दुरुपयोग हुआ है, वहां सख्त कार्रवाई होगी। संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि इस काम में लापरवाही बरतने पर उनके खिलाफ तत्काल विभागीय एक्शन होगा।
मंडी और सिरमौर जिलों में मिली सबसे बड़ी वित्तीय लापरवाही
पंचायती राज विभाग की आधिकारिक लिस्ट के मुताबिक राज्य के विभिन्न जिलों में करोड़ों रुपये का ऑडिट फंड अटका हुआ है। इस पूरे मामले में मंडी और सिरमौर जिला सबसे बड़े डिफॉल्टर बनकर सामने आए हैं। अकेले मंडी जिले में 21,68,81,739 रुपये और सिरमौर जिले में 11,65,15,854 रुपये की भारी रकम अभी तक पेंडिंग है।
इन दोनों बड़े जिलों के अलावा कांगड़ा में 4.96 करोड़, हमीरपुर में 3.96 करोड़ और चंबा में 2.09 करोड़ रुपये अटके हैं। वहीं शिमला में 1.26 करोड़ और सोलन में 1.07 करोड़ रुपये की राशि पेंडिंग है। कुल्लू, ऊना, बिलासपुर, लाहुल स्पीति और किन्नौर जिलों में भी लाखों रुपये का सरकारी बजट फंसा हुआ है।
पंचायती राज विभाग की अतिरिक्त निदेशक एवं सचिव नीलम दुल्टा ने इस संबंध में एक आधिकारिक लेटर जारी किया है। जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा सचिन ठाकुर ने इस कड़े आदेश की पुष्टि की है। सरकार के इस फैसले से अब भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
Reported By: Sunita Gupta


