Himachal School Education: हम बंधुआ मजदूर नहीं! स्कूल टाइम के बाद जनगणना ड्यूटी पर भड़के शिक्षक, दी बड़े आंदोलन की उग्र चेतावनी

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्कूल समय के बाद और छुट्टियों के दिनों में जनगणना कार्यों में ड्यूटी लगाने का विरोध अब काफी तेज हो गया है। शिक्षक संघ ने सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है।

शनिवार को राजकीय अध्यापक संघ की शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के साथ एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में शिक्षक नेताओं ने दोटूक कहा कि शिक्षक कोई बंधुआ मजदूर नहीं हैं। स्कूल के बाद या छुट्टी के दिन उनसे यह अतिरिक्त सरकारी कार्य जबरन नहीं करवाया जा सकता है।

प्रशासन का अड़ियल रवैया रहा तो होगा बड़ा आंदोलन

अध्यापक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अपना अड़ियल रवैया नहीं बदला, तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शिक्षा मंत्री को अहम सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जनगणना का यह काम शिक्षकों के बजाय गैर-सरकारी संस्थाओं से करवाना चाहिए।

उन्होंने मांग रखी कि शिक्षकों को केवल इस कार्य की निगरानी यानी सुपरविजन की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक से पूरी रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को इस विषय पर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है।

चुनाव में छोटी गलतियों पर निलंबन वापस लेने की मांग

शिक्षक नेताओं ने बैठक में कहा कि शिक्षक अभी हाल ही में पंचायत चुनाव करवाकर लौटे हैं। चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई छोटी-मोटी मानवीय गलतियों के लिए उन्हें निलंबित कर दिया गया। संघ ने मांग की है कि निलंबित शिक्षकों को सरकार तुरंत बहाल करे और उनका रुका इंक्रीमेंट जारी करे।

वीरेंद्र चौहान ने सुझाव दिया कि सीबीएसई स्कूलों में एक साल तक उन्हीं शिक्षकों को पढ़ाने का मौका मिले जो वहां पहले से तैनात हैं। विभाग को पहले उनका रिजल्ट देखना चाहिए। यदि किसी शिक्षक का रिजल्ट तय मानक से कम आता है, तभी उसका तबादला किया जाए।

रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष करने और तबादला नीति पर चर्चा

बैठक में शिक्षकों ने अपनी सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों के तबादलों पर लगा प्रतिबंध अब हटा देना चाहिए। साल में कम से कम एक बार सामान्य तबादले होने से दूर-दराज क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को राहत मिलेगी।

संघ ने सरकारी स्कूलों के बच्चों से ली जा रही कंप्यूटर फीस का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से हर महीने ₹110 की फीस लेना पूरी तरह गलत है। इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए ताकि गरीब परिवारों के बच्चों पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े।

शिक्षा मंत्री ने दिया आश्वासन, जुलाई में होगी अगली बैठक

शिक्षक संघ ने स्थानांतरण नीति की दूरी सीमा को 30 किलोमीटर से घटाकर 15 किलोमीटर करने की मांग की। इसके अलावा लंबित वेतन एरियर, महंगाई भत्ता जारी करने, विभिन्न श्रेणियों की पदोन्नतियां जल्द पूरी करने और टीजीटी से प्रवक्ता पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया तेज करने की मांग भी उठाई।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने संघ की अधिकांश मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने जुलाई के पहले हफ्ते में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और संघ के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। इस बड़ी बैठक में सभी मांगों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस अहम वार्ता के बाद अध्यापक संघ की राज्य कार्यकारिणी की बैठक भी आयोजित हुई। इसमें प्रदेशभर के 70 से अधिक शिक्षक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में वर्ष 2026-29 के नए सदस्यता अभियान, संगठनात्मक चुनाव और शिक्षकों से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर विस्तार से रणनीति तैयार की गई।

Reported By: Sunita Gupta

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