New Delhi News: केंद्र सरकार ने देश में टेलीविजन और रेडियो प्रसारण सेवाओं को व्यवस्थित करने के लिए एक समान नियामक ढांचे का प्रस्ताव तैयार किया है। इस नए नियम के तहत अब निजी यानी प्राइवेट रेडियो स्टेशनों पर भी राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक प्रासंगिकता से जुड़े कार्यक्रमों को प्रसारित करना पूरी तरह अनिवार्य होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को सार्वजनिक किए गए दूरसंचार नियम, 2026 के मसौदे में यह बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार ने इस नए कानून पर आम जनता और संबंधित पक्षों से आगामी 27 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
टीवी चैनलों के लिए तय हुआ निश्चित समय
मंत्रालय द्वारा जारी नए मसौदे के अनुसार सभी टीवी चैनलों को सुबह छह बजे से रात 11 बजे के बीच प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक सामाजिक सरोकार से जुड़ा कंटेंट दिखाना ही होगा। टीवी चैनलों के लिए इस तरह का प्रसारण चार वर्ष पहले ही अनिवार्य किया जा चुका था।
हालांकि पहले के नियमों में इस प्रकार के कंटेंट के प्रसारण के लिए कोई निश्चित समयावधि या टाइम स्लॉट निर्धारित नहीं की गई थी। लेकिन अब नए नियमों के जरिए सरकार ने समय-सीमा तय कर दी है। इससे देश के सभी टेलीविजन चैनलों को इस तय समय के भीतर ही कार्यक्रम दिखाने होंगे।
प्राइवेट रेडियो को देना होगा एक घंटा
नए मसौदा नियमों में प्राइवेट रेडियो सेवाओं पर अधिक जिम्मेदारी डाली गई है। इसके अनुसार प्रत्येक अधिकृत प्राइवेट रेडियो स्टेशन को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस के तरीके से काम करना होगा। उन्हें राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर आधारित कार्यक्रमों का प्रतिदिन कम से कम एक घंटे तक प्रसारण करना होगा।
सरकार का मुख्य उद्देश्य इस माध्यम से देश के सुदूर इलाकों तक महत्वपूर्ण और लाभकारी जानकारियां पहुंचाना है। इस नए समान नियामक ढांचे के लागू होने के बाद प्राइवेट एफएम और रेडियो चैनलों की प्रोग्रामिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आम जनता को इससे कई जरूरी जानकारियां रेडियो पर मिल सकेंगी।
Author: Pallavi Sharma


