Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मशहूर लोकगायक इन्द्र जीत ने संगीत जगत में राज्य का नाम रोशन किया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की संस्था संगीत नाटक अकादमी ने 10 जून को उन्हें प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार’ देने की आधिकारिक घोषणा की। इस बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि से पूरे प्रदेश के सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में भारी खुशी की लहर दौड़ गई है।
कुल्लू के इन्द्र जीत ने पारंपरिक धरोहर को बचाया
जिला कुल्लू के रहने वाले लोकगायक इन्द्र जीत ने हिमाचली लोकसंगीत और पारंपरिक धरोहर के संरक्षण में बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने बिना किसी औपचारिक म्यूजिक ट्रेनिंग या अकादमी शिक्षा के केवल अपनी कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। अपनी गजब की प्रतिभा के दम पर आज उन्होंने लोकगायन के क्षेत्र में एक खास पहचान बनाई है।
इन्द्र जीत के गानों में हिमाचल की समृद्ध लोक परंपराओं, स्थानीय बोलियों और पहाड़ी जीवन की खूबसूरत झलक साफ दिखती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे यूट्यूब और सोशल मीडिया पर उनके लोकगीतों को करोड़ों दर्शकों और श्रोताओं का प्यार मिला है। इस लोकप्रियता ने हिमाचली लोकसंगीत को अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर एक नई पहचान दिला दी है।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता में बड़ा योगदान
लोकगायक इन्द्र जीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी लगातार काम कर रहे हैं। उनके मशहूर लोकगीतों की लिस्ट में ‘लाड़ी शाऊंणी’, ‘पाखली माणु’, ‘बुधूआ मामा’, ‘तिरछी नज़रे’ और ‘सोलमा लाड़ी’ जैसे कई सुपरहिट और चर्चित गाने शामिल हैं, जिन्हें लोग बेहद पसंद करते हैं।
उनका सबसे चर्चित गाना ‘पाखली माणु’ हिमाचली टोपी में मोनाल पक्षी के असली पंख की जगह आर्टिफिशियल कलगी के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है। इस बेहतरीन पर्यावरण अनुकूल पहल के लिए हिमाचल प्रदेश के वन एवं वन्यजीव विभाग ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित भी किया है। वे अपने गानों से समाज को सुधारने का काम कर रहे हैं।
इसके साथ ही युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए उन्होंने ‘मता करदे नशा’ और ‘चिट्टा मुक्त हिमाचल’ जैसे अवेयरनेस वाले गाने गाए हैं। संगीत नाटक अकादमी का यह नेशनल अवॉर्ड न केवल इन्द्र जीत की व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह पूरी पहाड़ी संस्कृति का सम्मान है। उन्हें लगातार ढेरों शुभकामनाएं मिल रही हैं।
Reported By: Sunita Gupta


