Himachal Pradesh News: केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुक्खू सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामियों को छिपाने के लिए केंद्र पर झूठे आरोप मढ़ रही है। केंद्र ने राज्य को भरपूर बजट दिया, लेकिन कांग्रेस सरकार उसे सही तरीके से खर्च नहीं कर पाई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में हिमाचल को विशेष सहायता के रूप में ₹2,381 करोड़ दिए। इसके अलावा एनडीआरएफ के जरिए ₹2,006 करोड़ और बाहरी सहायता वाली परियोजनाओं के लिए ₹2,150 करोड़ की अतिरिक्त मदद भी राज्य को सीधे उपलब्ध कराई गई है।
हिमाचल में चल रही है पूरी तरह एडहॉक सरकार
नड्डा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को घेरते हुए कहा कि हिमाचल में अभी ‘एडहॉक सरकार’ चल रही है। यहां मुख्यमंत्री भी एडहॉक पर हैं क्योंकि सरकार तो असल में दिल्ली से रिमोट कंट्रोल द्वारा चलाई जा रही है। मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे बड़े पदों पर अतिरिक्त प्रभार देना प्रशासनिक विफलता का बड़ा प्रमाण है।
उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में इस समय ‘नो मैनेजमेंट, नो गवर्नेंस’ का माहौल बन चुका है। कांग्रेस सरकार कोई भी बड़ा फैसला लेने में पूरी तरह कमजोर साबित हो रही है। पूरे सूबे में विकास कार्यों को ठप करके केवल ‘कट मनी और कमीशन’ का खेल खेला जा रहा है।
करोड़ों रुपये का केंद्रीय फंड वापस जाने का आरोप
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की सुस्ती के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मिले करीब ₹300 करोड़ खर्च नहीं हो सके। यह भारी-भरकम राशि अब केंद्र को वापस लौटने की कगार पर है। 15वें वित्त आयोग से मिले ₹521 करोड़ में से भी आधी राशि को सरकार उपयोग नहीं कर पाई।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत राज्य के लिए 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्वीकृत हुए थे। लेकिन सुक्खू सरकार इनमें से केवल एक ही ब्लॉक का काम पूरा कर सकी है। इसके अलावा 12 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में से भी केवल एक ही लैब अब तक तैयार हो पाई है।
बल्क ड्रग पार्क परियोजना में जानबूझकर की देरी
नड्डा ने कहा कि केंद्र ने 11 अक्टूबर 2022 को ही बल्क ड्रग पार्क को मंजूरी दे दी थी। सरकार की लापरवाही के कारण इसकी पर्यावरणीय मंजूरी मिलने में ही तीन साल का लंबा वक्त लग गया। यह जरूरी मंजूरी काफी देरी से 25 सितंबर 2025 को जाकर विभाग को मिल सकी है।
केंद्र सरकार ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए ₹1,000 करोड़ का फंड मंजूर किया था। इसकी पहली किस्त के रूप में ₹225 करोड़ जारी भी किए गए थे। हिमाचल सरकार इसमें से केवल ₹102.13 करोड़ ही खर्च कर सकी। इस ढीली कार्यप्रणाली के कारण युवाओं के रोजगार के बड़े अवसर हाथ से चले गए।
मेडिकल डिवाइस पार्क प्रोजेक्ट से पीछे हटी सरकार
उन्होंने आगे बताया कि ₹100 करोड़ की लागत वाले मेडिकल डिवाइस पार्क को फरवरी 2022 में मंजूरी मिली थी। हिमाचल को इसका बड़ा केंद्र बनाने का मौका मिला था, लेकिन सुक्खू सरकार अक्टूबर 2024 में खुद इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गई। इससे केंद्र की जारी की गई ₹30 करोड़ की पहली किस्त वापस लौटानी पड़ी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल धर्मशाला में आपदा राहत के लिए बिना किसी शर्त के ₹1500 करोड़ देने की घोषणा की थी। राज्य सरकार आज तक केंद्र को यह नहीं बता पाई कि यह पैसा कहां और किस मद में खर्च किया गया है। केंद्र धन देने को तैयार है, लेकिन उसका सही हिसाब भी जरूरी है।
सीएजी की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए नड्डा ने कहा कि हिमाचल पर कर्ज का कुल बोझ ₹1 लाख करोड़ से ऊपर चला गया है। राज्य का ऋण-जीडीपी अनुपात अब बढ़कर 41 फीसदी तक पहुंच चुका है। सुक्खू सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
उन्होंने अंत में केंद्र के कामों को गिनाते हुए कहा कि हिमाचल में ₹40,000 करोड़ से अधिक की नेशनल हाईवे परियोजनाएं चल रही हैं। रेलवे विकास के लिए रिकॉर्ड ₹2,911 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके तहत राज्य में चार वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाने का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
Reported By: Harish Rawat


