New Delhi News: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में तथाकथित विधानसभा के चुनाव के लिए रविवार को मतदान प्रक्रिया जारी है। इस पर भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
नई दिल्ली ने बेहद सख्त लहजे में अपना पुराना और स्पष्ट रुख दोहराया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के संपूर्ण केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र भी शामिल है, वे सभी भौगोलिक भू-भाग पूरी तरह से भारत के अभिन्न अंग हैं।
वर्ष 1947 में हुआ था भारत में ऐतिहासिक और पूर्ण विलय
केंद्र सरकार ने आधिकारिक बयान में साफ किया कि वर्ष 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय हुआ था। इसके परिणामस्वरूप यह पूरा क्षेत्र हमेशा के लिए संप्रभु भारत का अटूट हिस्सा बन गया, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया है।
भारतीय राजनयिकों ने विश्व मंच पर यह बात जोर देकर कही है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान ने इस खूबसूरत भारतीय क्षेत्र पर पूरी तरह से अवैध और बलपूर्वक कब्जा कर रखा है। वहां आयोजित किए जा रहे किसी भी तथाकथित लोकतांत्रिक चुनाव की कोई कानूनी वैधता नहीं है।
सैकड़ों मतदान केंद्रों को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया
इस बीच विवादित क्षेत्र में वोटिंग की प्रक्रिया सुबह आठ बजे शुरू हुई, जो शाम पांच बजे तक लगातार जारी रहेगी। पाकिस्तानी चुनाव अधिकारियों द्वारा जारी की गई आधिकारिक लिस्ट के अनुसार, पूरे पर्वतीय क्षेत्र में कुल 1,391 पोलिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
सुरक्षा इनपुट के आधार पर प्रशासन ने इनमें से 488 केंद्रों को सामान्य, 349 को संवेदनशील और 551 मतदान केंद्रों को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा है। इस क्षेत्र में चुनावी हिंसा और गड़बड़ी को रोकने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
आरक्षित सीटों पर सीधे चुनाव की व्यवस्था नहीं
इस तथाकथित विवादित विधानसभा के भीतर कुल 33 सीटें मौजूद हैं। इनमें से केवल 24 सीटों पर ही प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के जरिए आम जनता द्वारा प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाता है। बाकी बची सीटों को विशेष नियमों के तहत आरक्षित रखा गया है।
इनमें से आठ सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के लिए पूरी तरह रिजर्व हैं। यदि इस क्षेत्र के पुराने चुनावी इतिहास को देखें, तो इस्लामाबाद के केंद्रीय शासन में जो राजनीतिक दल सत्तारूढ़ होता है, वही यहां धांधली से जीतता है।
Author: Harikarishan Sharma


