Delhi News: आज के बच्चे ऑनलाइन गेम से लेकर कई आधुनिक चीजें बहुत जल्दी सीख जाते हैं। दरअसल वे जिस डिजिटल दुनिया में बड़े हो रहे हैं, वहां टेक्नोलॉजी के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पैरेंटिंग की चुनौतियां भी काफी बढ़ गई हैं।
आज खूबसूरत पेंटिंग बनाने से लेकर कंटेंट लिखने और वीडियो क्रिएट करने तक का काम एआई सेकेंड्स में कर देता है। लेकिन कुछ ऐसी मानवीय स्किल्स हैं जिन्हें एआई कभी रिप्लेस नहीं कर सकता है। ये स्किल्स बच्चों को भविष्य की दुनिया में सबसे आगे रखने में मदद करेंगी।
एआई के दौर में सबसे कीमती होगी भावनाएं समझना
भविष्य के वर्कप्लेस पर कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए एआई के लिए तैयार रहना जरूरी है। लेकिन असल जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए इंसानों में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिससे एआई कोई मुकाबला नहीं कर सकता। इसमें सबसे पहली और महत्वपूर्ण स्किल इमोशनल इंटेलिजेंस यानी भावनात्मक समझ है।
एआई आपके शब्दों पर रिएक्ट कर सकता है और डेटा के हिसाब से समाधान बता सकता है। लेकिन यह इंसानी भावनाओं को कभी महसूस नहीं कर सकता। जो बच्चे अपने इमोशंस को सही तरह से कंट्रोल करना जानते हैं, वे भविष्य में हर कठिन परिस्थिति को ज्यादा बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे।
सवाल पूछने की आदत और रचनात्मकता है जरूरी
बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग यानी तार्किक सोच विकसित करना बेहद जरूरी है। आज इंटरनेट पर हर सवाल का जवाब मौजूद है, लेकिन सही सवाल पूछना सबसे बड़ी कला है। बच्चों को सिखाएं कि वे किसी भी बात को बिना सोचे-समझे न स्वीकारें, बल्कि उस पर अपना खुद का दृष्टिकोण बनाना सीखें।
इसके साथ ही बच्चों की रचनात्मकता यानी क्रिएटिविटी को बढ़ावा दें। एआई कमांड देने पर फोटो या वीडियो बना सकता है, लेकिन वह इंसानों की तरह कल्पना नहीं कर सकता। संगीत, चित्रकला या लेखन जैसी विधाएं केवल मानवीय अनुभवों, जिज्ञासाओं और भावनाओं के जीवंत होने से ही जन्म लेती हैं।
बदलते दौर के साथ खुद को ढालना यानी अडैप्टेबिलिटी भी एक जीवन रक्षक स्किल है। यह बच्चों को गलतियों से सीखने और असफल होने पर भी दोबारा खड़े होने का हौसला देती है। इसके अलावा बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना सिखाएं ताकि वे हर काम के लिए तकनीक के गुलाम न बनें।
Author: Karuna Sen


