क्या भारत-अमेरिका के बीच होने वाली है ऐतिहासिक ट्रेड डील? पीयूष गोयल ने शुल्क रियायत पर रखी ये बड़ी और कड़क शर्त

Delhi News: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को बताया कि दोनों महाशक्तियों के बीच पहले चरण का ऐतिहासिक व्यापार समझौता जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

पीयूष गोयल ने साफ लफ्जों में कहा कि यह व्यापार समझौता तभी जमीन पर उतरेगा जब अमेरिका भारतीय सामानों को विशेष तरजीह देगा। भारत आयात शुल्क के मामले में अमेरिकी बाजार के भीतर अपने सभी वैश्विक प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले एक ठोस और बड़ी बढ़त चाहता है।

इसका सीधा मतलब यह है कि जब वाशिंगटन अपने यहां भारत के प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले कम शुल्क लगाएगा, तभी नई दिल्ली इस डील पर अंतिम मुहर लगाएगी। अमेरिकी प्रशासन अपने घरेलू कानून सेक्शन 301 के तहत जल्द ही सभी देशों पर दोबारा टैक्स थोप सकता है।

मौजूदा समय में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश के मुताबिक वहां के बाजारों में सभी आयाती देशों पर 10 प्रतिशत का एकसमान शुल्क लगता है। इस कानूनी आदेश की तय समयसीमा आगामी 24 जुलाई को पूरी तरह समाप्त होने जा रही है।

बीते फरवरी महीने में दोनों देशों के बीच बनी थी पहली सहमति

इससे पहले गत फरवरी महीने में भारत और अमेरिका इस बड़े व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अपनी सैद्धांतिक सहमति जता चुके हैं। इस विशेष सहमति के तहत अमेरिकी प्रशासन भारतीय उत्पादों पर करीब 18 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाने की तैयारी में है।

पीयूष गोयल के अनुसार इस पूरी बातचीत में भारत का मुख्य एजेंडा यही है कि उसे अमेरिकी बाजार में हर हाल में चीनी या अन्य प्रतिस्पर्धी देशों से कम टैक्स देना पड़े। भारत के लिए शुल्क की निश्चित दर से ज्यादा जरूरी प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाना है।

इस व्यापारिक डील को अंतिम रूप देने के लिए दो से लेकर चार जून तक नई दिल्ली में दोनों देशों के शीर्ष वार्ताकारों की एक उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में समझौते के अंतिम कानूनी दस्तावेज के मसौदे को फाइनल किया जाएगा।

अमेरिकी राजदूत ने कहा- भारत के साथ 99 प्रतिशत मुद्दों पर बनी बात

भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत गोर ने भी इस द्विपक्षीय व्यापारिक प्रगति पर एक बड़ा और सकारात्मक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार समझौते को लेकर लगभग 99 प्रतिशत जटिल मुद्दों पर पूरी सहमति बन चुकी है।

अमेरिकी राजदूत ने रेखांकित किया कि अमेरिका मौजूदा समय में भारतीय उत्पादों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद निर्यात बाजार है। अमेरिका के नागरिकों की उच्च क्रय शक्ति होने के कारण भारत को वहां अपना घरेलू निर्यात बढ़ाने का एक शानदार मौका मिलेगा।

अमेरिकी कानून का यह खास सेक्शन 301 वहां की सरकार को एकतरफा और असीमित ताकत देता है। इसके तहत अमेरिकी प्रशासन किसी भी विदेशी देश के व्यापार संचालन की गोपनीय जांच कर सकता है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वह उन पर एकतरफा दंडात्मक शुल्क लगा सकता है।

Author: Rajesh Kumar

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