चारधाम यात्रा में खत्म होगी भाषाई दूरी: अब ‘भाषिणी ऐप’ कराएगा तमिल बाबू और गढ़वाली भाई की बात

Uttarakhand News: चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए अब भाषा का अंतर कोई बाधा नहीं बनेगा। तमिलनाडु के रामेश्वरम से आए मुरुगन और सोनप्रयाग के होम स्टे संचालक दीवान सिंह के बीच हुआ एक दिलचस्प संवाद इस बड़े तकनीकी बदलाव का गवाह बना है।

मोबाइल ऐप ने पल भर में दूर की दूरी

दरअसल, मुरुगन को केवल तमिल भाषा आती है और होम स्टे संचालक दीवान को सिर्फ गढ़वाली भाषा का ज्ञान है। मुरुगन को कमरे का किराया और आगे के सफर की जानकारी चाहिए थी। इस मुश्किल घड़ी में दीवान ने तुरंत अपने मोबाइल में केंद्र सरकार का ‘भाषिणी वॉइस ऐप’ निकाला।

दीवान ने मुरुगन की तमिल बात को ऐप में डाला और ऐप ने तुरंत उसका अनुवाद गढ़वाली में कर दिया। इसके बाद दीवान ने गढ़वाली में जवाब दिया, जिसे ऐप ने तमिल में बदल दिया। इसी तरह कोलकाता से आए सुदीप्तो सेन और स्थानीय दुकानदार संजय के बीच भी इस ऐप ने दुभाषिए का काम किया।

देश की 22 भाषाओं के साथ उत्तराखंड की बोलियां

उत्तराखंड के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इस ऐप में देश की 22 आधिकारिक भाषाओं के साथ-साथ राज्य की प्रमुख बोलियों, गढ़वाली और कुमाऊंनी को भी जोड़ दिया है। हर साल करोड़ों पर्यटक यहां आते हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों से बातचीत करने, होटल खोजने और परिवहन सेवाओं में काफी दिक्कतें होती थीं।

यह वॉइस-आधारित ऐप पूरी तरह डिजिटल तकनीक पर काम करता है। इसमें कोई भी व्यक्ति अपनी मातृभाषा में बोलकर दूसरी भाषा के व्यक्ति को अपनी बात समझा सकता है। इस बेहतरीन पहल से न केवल देश भर के पर्यटकों को सुविधा होगी, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और स्थानीय बोलियों का भी प्रचार-प्रसार होगा।

पर्यटन से जुड़े लोगों को किया जाएगा जागरूक

आईटी विभाग की योजना के अनुसार, चारधाम मार्ग पर स्थित सभी होटलों, होम स्टे संचालकों, टैक्सी चालकों और टूरिस्ट गाइडों को इस ऐप के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव नितेश कुमार झा ने बताया कि इस ऐप का जल्द ही व्यापक स्तर पर ट्रायल शुरू होने जा रहा है।

इस ऐप में ऑटोमेटिक स्पीच रिकग्निशन की सुविधा है, जो बोली गई बात को तुरंत टेक्स्ट में बदल देती है। इसके अलावा, न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन से सटीक अनुवाद होता है और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक से शब्दों को आवाज मिलती है। इसमें डॉक्यूमेंट्स पढ़ने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) मॉडल भी शामिल है।

Author: Harish Rawat

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