Mumbai News: सोने और चांदी की कीमतों में इन दिनों भारी गिरावट आ रही है। रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद दोनों धातुओं के दाम तेजी से गिर रहे हैं। वैश्विक बाजारों में चौतरफा बिकवाली से निवेशकों में निराशा का माहौल है। वहीं आभूषण खरीदने वालों के लिए यह एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर है。
इस साल जनवरी के आखिरी सप्ताह में सोने और चांदी ने इतिहास रच दिया था। वैश्विक बाजार में सोना छप्पन सौ पच्चीस डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। वहीं चांदी एक सौ बाईस डॉलर प्रति औंस की ऐतिहासिक ऊंचाई पर थी। भारतीय बाजार में भी सोना एक लाख बयासी हजार रुपये के पार हो गया था।
इतनी बड़ी तेजी के बाद बाजार में अचानक मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया। ऊपरी स्तरों से सोने की कीमत में लगभग तेईस प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं चांदी भी चौवालीस प्रतिशत तक टूट गई। सट्टेबाजी का जोर अधिक होने के कारण भारतीय बाजार में चांदी के दामों में सबसे ज्यादा मंदी देखने को मिली है।
क्या और गिरेंगे सोने के दाम?
पिछले तीन महीनों से सोने और चांदी की कीमतें एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही थीं। लेकिन अब इन पर भारी दबाव साफ दिखने लगा है। मुंबई में सोने का भाव एक लाख तिरपन हजार रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया है। इसके साथ ही चांदी भी ढाई लाख रुपये प्रति किलो तक नीचे खिसक गई है।
पिछले चार सालों में निवेशकों को इन धातुओं ने छप्पर फाड़ रिटर्न दिया था। दो हजार पच्चीस में सोने में उनासी प्रतिशत और चांदी में एक सौ अड़सठ प्रतिशत की जबर्दस्त तेजी आई थी। लगातार चार साल की तेजी के बाद इस साल दोनों कीमती धातुओं में भारी नुकसान हो रहा है।
युद्ध के बावजूद क्यों आई मंदी?
आमतौर पर युद्ध के समय सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में तेजी आती है। लेकिन अमेरिका, इजराइल और ईरान युद्ध में बिल्कुल उल्टा हुआ। अरब देशों पर ईरानी हमलों के कारण दुबई जैसे बड़े स्वर्ण बाजारों में व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। इस कारण इतिहास में पहली बार सोने की कीमतें भारी डिस्काउंट पर आ गईं।
ज्वेलमेकर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शाह के अनुसार इस साल अब तेजी की कोई उम्मीद नहीं है। व्यापार घाटा कम करने के लिए सरकार ने आयात शुल्क काफी बढ़ा दिया है। इससे बाजार में मांग घट गई है। जानकारों का अनुमान है कि जल्द ही सोना एक लाख चालीस हजार रुपये के स्तर तक आ सकता है।
Author: Rajesh Kumar


