Crime News: सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की खूबसूरत तस्वीरें और उनकी लाइफ से जुड़े बड़े अचीवमेंट्स शेयर करना आजकल बेहद आम हो चुका है। हालांकि, लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां अब चेतावनी दे रही हैं कि ये मासूम दिखने वाले पोस्ट्स अनजाने में ही मासूम बच्चों को बड़े साइबर खतरों के सामने ला खड़ा करते हैं।
असम पुलिस ने चाइल्ड साइबर सेफ्टी पर एक नई और बेहद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इसमें सभी पैरेंट्स, स्कूलों और विभिन्न संस्थानों से नाबालिगों के बारे में ऑनलाइन जानकारी शेयर करते समय विशेष सावधानी बरतने और सतर्क रहने का कड़ा आग्रह किया गया है।
इस नई एडवाइजरी के मुताबिक, बच्चों की तस्वीरें, नाम, क्लास, स्कूल की डिटेल्स, लोकेशन और रियल-टाइम अपडेट्स जैसी जानकारियों का साइबर अपराधियों द्वारा गलत इस्तेमाल किए जाने की पूरी आशंका रहती है। पुलिस ने जोर दिया है कि डिजिटल युग में बच्चों की प्राइवेसी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
कैसे हो सकता है आपके बच्चों की जानकारी का गलत इस्तेमाल?
पुलिस की इस आधिकारिक एडवाइजरी में ऑनलाइन बहुत ज्यादा जानकारी यानी ‘ओवरशेयरिंग’ करने से जुड़े कई गंभीर खतरों को हाइलाइट किया गया है। साइबर क्रिमिनल्स पब्लिकली उपलब्ध इन जानकारियों का इस्तेमाल करके बच्चों के नाम पर तुरंत फेक प्रोफाइल्स बना सकते हैं।
अपराधी आइडेंटिटी थेफ्ट (पहचान चोरी) करने या खतरनाक साइबर बुलिंग के जरिए मासूम बच्चों को अपना आसान टारगेट बना सकते हैं। अथॉरिटीज ने AI-पावर्ड इमेज मैनिपुलेशन और खतरनाक मॉर्फिंग टेक्नोलॉजी को लेकर भी गहरी चिंता जताई है, जो तस्वीरों को बदलकर उनका गलत इस्तेमाल कर सकती हैं।
इसके अलावा, ऑनलाइन मौजूद पर्सनल इंफॉर्मेशन का इस्तेमाल बच्चों और उनके भोले-भाले परिवारों को टारगेट करने वाले वित्तीय फ्रॉड, सोशल इंजीनियरिंग अटैक्स या अन्य साइबर खतरों के लिए किया जा सकता है। इंटरनेट पर डिजिटल फुटप्रिंट्स हमेशा के लिए परमानेंट हो जाते हैं।
इसीलिए साइबर एक्सपर्ट्स अब पैरेंट्स को सख्त सलाह देते हैं कि वे नाबालिगों से जुड़ी किसी भी प्रकार की सेंसिटिव जानकारी रिवील करने वाली कोई भी पोस्ट इंटरनेट पर डालने से पहले दस बार अच्छी तरह सोच-विचार जरूर कर लें, ताकि भविष्य में कोई पछतावा न हो।
पैरेंट्स और स्कूलों के लिए बेहद जरूरी सेफ्टी मेजर्स
असम पुलिस ने विशेष रूप से सिफारिश की है कि पैरेंट्स और सभी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स बच्चों से जुड़े कंटेंट को ऑनलाइन पोस्ट करने से पहले उसका अच्छी तरह रिव्यू कर लें। एडवाइजरी में यूजर्स से कहा गया है कि वे बच्चों की तस्वीरों के साथ उनकी पर्सनल डिटेल्स बिल्कुल शेयर न करें।
अथॉरिटीज ने इस बात पर भी जोर दिया है कि बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी और फिजिकल सेफ्टी को हमेशा पहली प्रायोरिटी दी जानी चाहिए। स्कूलों को भी अपनी ऑफिशियल वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्टूडेंट्स की जानकारी पब्लिश करने को लेकर साफ और कड़े नियम बनाने चाहिए।
एक रिस्पॉन्सिबल डिजिटल बिहेवियर के जरिए इन ऑनलाइन खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड या ऑनलाइन एब्यूज के मामलों में, विक्टिम्स को तुरंत नेशनल साइबरक्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
Author: Raj Thakur

