LPG सिलेंडर की कीमतों में भयंकर उबाल, जानें सरकार को एक सिलेंडर पर कितना हो रहा नुकसान?

Delhi News: देश में रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर के दाम एक बार फिर बढ़ गए हैं। सात जून से दिल्ली में चौदह किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत नौ सौ तेरह रुपये से बढ़ाकर नौ सौ बयालीस रुपये कर दी गई है। इस बढ़ोतरी के बाद भी सरकार का कहना है कि उपभोक्ता अभी पूरी लागत नहीं दे रहे हैं।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुई दिक्कतों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में बड़ी तेजी आई है। इसका सीधा असर भारत के आयात खर्च पर भी पड़ा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर को भारत मंगाने और तैयार करने की कुल लागत सोलह सौ रुपये से ज्यादा हो गई है।

एलपीजी सिलेंडर के साथ मिलता है लाखों का बीमा

बहुत कम लोगों को पता है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर लेने पर ग्राहकों को लाखों रुपये का बीमा कवर भी मिलता है। सरकारी तेल कंपनियां अपने सभी पंजीकृत ग्राहकों के लिए विशेष पब्लिक लाइबिलिटी इंश्योरेंस पॉलिसी लेती हैं। इसका मकसद हादसे की स्थिति में प्रभावित लोगों को तुरंत राहत देना होता है।

अगर एलपीजी सिलेंडर से हुए हादसे में किसी की मौत होती है, तो छह लाख रुपये तक का मुआवजा मिलता है। इसके अलावा घायल होने पर इलाज के लिए एक घटना में कुल तीस लाख रुपये तक का मेडिकल कवर दिया जाता है। इसमें एक व्यक्ति के लिए अधिकतम दो लाख रुपये तक के इलाज का खर्च शामिल है।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ी राहत

हाल ही में घरेलू सिलेंडर की कीमत में उनतीस रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले सात मार्च को भी साठ रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए थे। यानी तीन महीने के भीतर कुल नवासी रुपये का इजाफा हो चुका है। तेल कंपनियों को कीमत बढ़ने से पहले हर सिलेंडर पर करीब सात सौ तीन रुपये का भारी नुकसान हो रहा था।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तीन सौ रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी। इस वजह से उन्हें नौ सौ बयालीस रुपये के बजाय प्रभावी रूप से केवल छह सौ बयालीस रुपये ही चुकाने होंगे। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिसकी कीमतें सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस से जुड़ी होती हैं।

पश्चिम एशिया संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें करीब छियालीस प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। घरेलू एलपीजी बिक्री पर होने वाला कुल नुकसान पिछले वित्त वर्ष के अंत तक लगभग साठ हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी सहायता मंजूर की है।

Author: Rajesh Kumar

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