Delhi News: स्मार्टफोन यूजर्स के बीच काफी समय से एक सलाह दी जाती रही है। फोन की बैटरी को बेहतर कंडीशन में बनाए रखने के लिए उसे हमेशा बीस से अस्सी प्रतिशत के बीच ही चार्ज करना चाहिए। बहुत से लोग इस नियम को सख्ती से फॉलो भी करते हैं और अपने डिवाइस को कभी पूरा चार्ज नहीं करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि इस नियम को मानने से बैटरी की लाइफ बढ़ती है। उसकी हेल्थ लंबे समय तक अच्छी बनी रहती है। लेकिन क्या यह नियम हर यूजर के लिए सच में फायदेमंद है? आज विज्ञान और तकनीकी विशेषज्ञों के दावों के आधार पर हम इस बात की पूरी सच्चाई विस्तार से जानेंगे।
जानिए क्या कहते हैं तकनीकी एक्सपर्ट्स?
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्सी प्रतिशत चार्जिंग नियम का कुछ वैज्ञानिक आधार जरूर है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि फोन को कभी भी सौ प्रतिशत तक चार्ज न किया जाए। अगर आप रोजाना फोन को सिर्फ अस्सी प्रतिशत तक चार्ज करते हैं, तो आप खुद एक बड़ी गलती कर रहे हैं।
आप शुरुआत से ही अपने फोन की टोटल बैटरी कैपेसिटी का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, पांच हजार एमएएच बैटरी वाले फोन को सिर्फ अस्सी प्रतिशत तक चार्ज करने पर आप वास्तव में केवल चार हजार एमएएच कैपेसिटी का ही लाभ उठा पाते हैं।
सॉफ्टवेयर पर पड़ता है इसका बुरा असर
स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियां समय के साथ धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं। चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के दौरान होने वाले रासायनिक बदलावों के कारण बैटरी हेल्थ कम होती रहती है। ऐसे में सिर्फ अस्सी प्रतिशत तक चार्ज करने से बैटरी की प्राकृतिक गिरावट पूरी तरह नहीं रुकेगी।
इतना ही नहीं, लगातार लिमिटेड चार्जिंग करने से बैटरी प्रतिशत की सटीक गणना प्रभावित होती है। इससे फोन के सॉफ्टवेयर कैलिब्रेशन पर भी बहुत बुरा असर देखने को मिल सकता है। इसलिए एक्सपर्ट्स समय-समय पर फोन को पूरा सौ प्रतिशत तक चार्ज करने की भी सलाह देते हैं।
ऐसा करने से फोन का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम बिल्कुल सही तरीके से काम करता रहता है। ओवरऑल कहें तो बैटरी की देखभाल करना बहुत जरूरी है। लेकिन इसके लिए अपने महंगे फोन की पूरी कैपेसिटी का इस्तेमाल छोड़ देना हमेशा सबसे बेहतर समाधान नहीं कहा जा सकता है।
Author: Mohit


