Delhi News: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों ने देश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों का असर अन्य राज्यों पर साफ दिख रहा है। वहीं असम में एक दशक की सत्ता के बाद भाजपा नया जनादेश पा चुकी है। अब सभी राजनीतिक दलों की नजरें अगले साल होने वाले बड़े राज्यों के चुनावों पर टिक गई हैं।
उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने साख बचाने की बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में भाजपा ने लगातार दो बार सरकार बनाई है। हालांकि पिछले चुनाव में उसकी सीटों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को राज्य में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। यही कारण है कि आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए अपनी साख बचाने का सबसे बड़ा मुकाबला बन गया है।
अगले साल देश के सात महत्वपूर्ण राज्यों में चुनावी बिगुल बजने वाला है। मार्च में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में मतदान होगा। इसके बाद नवंबर में हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव कराए जाएंगे। इन सात राज्यों में से छह पर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस एक प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में खड़ी है।
गठबंधन और सत्ता विरोधी लहर के भरोसे कांग्रेस की चुनावी रणनीति
कांग्रेस पार्टी ने इन आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस इस बार समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी। पार्टी नेताओं को भरोसा है कि वे हिमाचल प्रदेश में अपनी सत्ता बचा लेंगे। इसके साथ ही वे अन्य चार राज्यों में भी सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार के चार साल पूरे होने वाले हैं। कुछ विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद भी उपचुनाव में बागी नेता भाजपा के टिकट पर हार गए। आर्थिक तंगी के बावजूद राज्य में फिलहाल कोई मजबूत सत्ता विरोधी लहर नहीं दिख रही है। इससे कांग्रेस आलाकमान राहत की सांस ले रहा है।
पंजाब से लेकर पूर्वोत्तर तक विपक्षी दलों की घेराबंदी तेज
पंजाब में वर्तमान में आम आदमी पार्टी शासन कर रही है। वहां मजबूत संगठन और बड़े चेहरों के दम पर कांग्रेस खुद को मुख्य मुकाबले में देख रही है। गोवा में भी भाजपा सरकार के दस साल के कार्यकाल से पैदा हुई एंटी-इन्कम्बैंसी का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस आंतरिक मतभेदों को सुलझाने में जुटी है।
मणिपुर में हालिया लोकसभा की दोनों सीटें जीतकर कांग्रेस ने अपनी वापसी के संकेत दे दिए हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में उनका पुनरुत्थान मणिपुर की धरती से ही शुरू होगा। हालांकि पश्चिमी राज्य गुजरात में पार्टी को चुनावी मोर्चे पर बड़ी सफलता की उम्मीद काफी कम नजर आ रही है।
Author: Harikarishan Sharma


