Himachal News: पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध की आग अब हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योग (फार्मा सेक्टर) को झुलसा रही है। कच्चे माल की कीमतों में अचानक लगी आग से दवाइयों का उत्पादन बुरी तरह लड़खड़ा गया है। हालत यह है कि प्रदेश की करीब 500 छोटी-बड़ी दवा फैक्ट्रियों पर ताला लटकने की नौबत आ गई है। दवा निर्माताओं ने केंद्र सरकार से तुरंत दखल देने की गुहार लगाई है। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो देश भर में जीवनरक्षक दवाओं की भारी किल्लत हो सकती है।
250 वाली दवा का कच्चा माल 450 के पार
दवा बनाने के लिए सबसे जरूरी कच्चा माल ‘एपीआई’ (API) होता है। पिछले सिर्फ 15 दिनों में इसके दाम आसमान छूने लगे हैं। बुखार में काम आने वाली आम दवा पैरासिटामोल का कच्चा माल 250 रुपये से उछलकर 450 रुपये प्रति किलो हो गया है। सॉल्वेंट्स और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में 200 से 300 फीसदी तक की भयानक बढ़ोतरी हुई है। महंगी लागत के बीच सस्ती दवाएं बनाना अब कंपनियों के लिए नामुमकिन सा हो गया है।
40 फीसदी उत्पादन ठप, हजारों नौकरियों पर मंडराया खतरा
हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (HDMA) के अनुसार, कच्चे माल के इस भयंकर संकट से 40 प्रतिशत दवा उत्पादन पहले ही रुक चुका है। अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंकड़ा 60 फीसदी तक जा सकता है। इससे न केवल अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई रुकेगी, बल्कि हजारों मजदूरों की नौकरियां भी छिन जाएंगी। बाजार में जानबूझकर एक कृत्रिम कमी भी पैदा की जा रही है। इसका सीधा और भारी नुकसान आम मरीज को उठाना पड़ेगा।
पैकेजिंग और गत्ता उद्योग भी बर्बादी की कगार पर
दवाओं की पैकिंग के लिए गत्ता, एल्यूमीनियम फॉयल और कांच की बोतलें चाहिए। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी के दाम बढ़ने से ये सभी चीजें भी 20 से 40 फीसदी तक महंगी हो गई हैं। हिमाचल प्रदेश गत्ता व प्रिंटिंग पैकेजिंग संघ के सुरेंद्र जैन बताते हैं कि विदेशों से आने वाला कच्चा माल बहुत महंगा हो गया है। पेपर मिलों से गत्ता 15 फीसदी महंगा मिल रहा है। मजबूरी में फैक्ट्रियां अपना उत्पादन बंद करने पर विचार कर रही हैं।
नकली दवाओं के बड़े खेल की चेतावनी
बाजार में दवाओं की कमी का सीधा फायदा हमेशा कालाबाजारी करने वाले उठाते हैं। एचडीएमए के राज्य प्रवक्ता संजय शर्मा ने इस भयानक खतरे को लेकर साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर कच्चे माल पर सरकार ने ‘प्राइस सीलिंग’ (मूल्य नियंत्रण) तुरंत लागू नहीं की, तो बाजार में नकली दवाओं का बड़ा जाल बिछ जाएगा। युद्ध की इस विकट स्थिति में केंद्र सरकार को तुरंत जागना होगा। देश की गरीब जनता को महंगी और नकली दवाओं के चंगुल से बचाने का यही सही वक्त है।


