Mumbai News: देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ अगले सप्ताह बाजार में दस्तक दे सकता है। मामले से जुड़े उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक एक्सचेंज आगामी 15 या 16 जून 2026 को बाजार नियामक सेबी के पास अपने शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है।
एनएसई के निदेशक मंडल ने छह फरवरी को इस मेगा आईपीओ को अपनी हरी झंडी दी थी। बोर्ड ने यह महत्वपूर्ण मंजूरी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद दी थी। समाचार एजेंसी भाषा के सूत्रों के मुताबिक यह आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश यानी ओएफएस पर आधारित होने वाला है।
इसका सीधा मतलब यह है कि इस बड़े आईपीओ में स्टॉक एक्सचेंज की तरफ से कोई भी नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा। एक्सचेंज के वर्तमान शेयरधारक ही सार्वजनिक तौर पर अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा के पेंशन योजना निवेश बोर्ड की भी इसमें उल्लेखनीय हिस्सेदारी है।
एक दशक से को-लोकेशन विवाद में फंसा था लिस्टिंग का मामला
एनएसई की बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना लगभग एक दशक से विभिन्न नियामकीय और कानूनी अड़चनों के कारण अटकी हुई थी। यह एक्सचेंज मुख्य रूप से ‘को-लोकेशन’ विवाद के चलते जांच के दायरे में था। जनवरी में सेबी द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र दिए जाने के बाद इस रुकी हुई आईपीओ प्रक्रिया को दोबारा रफ्तार मिली है।
एनएसई के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बड़ी बीमा कंपनियां, दिग्गज विदेशी निवेशक और लाखों व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सबसे बड़ी शेयरधारक बनी हुई है।
इसके साथ ही भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई और उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक साबित हो सकता है। गैर-सूचीबद्ध बाजार में अभी एनएसई का मूल्यांकन पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।
बीस बड़े मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति और करोड़ों का निपटान भुगतान
एक्सचेंज के वर्तमान में लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं। गौरतलब है कि एनएसई ने पहली बार साल 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे। लेकिन तब नियामक सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण इस पर रोक लगा दी थी।
अब मेगा आईपीओ की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए एनएसई ने 20 मर्चेंट बैंकर नियुक्त किए हैं। इसके साथ ही देश के बड़े कानूनी सलाहकारों और अन्य वित्तीय मध्यस्थों को भी इस काम में शामिल किया गया है। को-लोकेशन मामले को सुलझाने के लिए एनएसई ने जून 2025 में सेबी के समक्ष निपटान आवेदन दिया था।
इस पुराने विवाद में कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स पर एक्सचेंज की ट्रेडिंग प्रणाली तक विशेष और अवैध पहुंच प्राप्त करने का आरोप लगा था। वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एनएसई ने साल 2025 में मामले के पूर्ण निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान करने की पेशकश की थी।
इस बड़े वित्तीय निपटान के बाद ही एक्सचेंज की बाजार में लिस्टिंग की राह पूरी तरह आसान हुई है। शेयर बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि सेबी के पास आधिकारिक दस्तावेज दाखिल होने के बाद एनएसई के आईपीओ की वास्तविक समयसीमा, शेयर प्राइस और कुल आकार को लेकर अधिक स्पष्टता सामने आएगी।
Author: Rajesh Kumar


