Himachal Pradesh News: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के खिलाफ छात्र संगठन सड़क पर उतर आया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की राज्य कमेटी ने गुरुवार को राजधानी शिमला में एक विशाल और आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया।
उपायुक्त कार्यालय के समीप आयोजित इस तीखे प्रदर्शन के दौरान गुस्साए कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गिरफ्तारियां देकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। संगठन ने सीधा आरोप लगाया कि एजेंसी निष्पक्ष परीक्षा संचालन में पूरी तरह विफल रही है। इससे देशभर के लाखों होनहार विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है।
पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ी से साख पर बट्टा
छात्र नेताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की बढ़ती घटनाओं ने राष्ट्रीय स्तर के टेस्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन प्रशासनिक खामियों और तकनीकी समस्याओं का सीधा बुरा असर देश के करोड़ों छात्रों और हिमाचल के युवाओं पर पड़ा है।
संगठन ने नीट-यूजी, यूजीसी-नेट और सीयूईटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं से जुड़े बड़े विवादों का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही समस्याएं देश के परीक्षा सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करती हैं। हर तकनीकी गड़बड़ी विद्यार्थियों की वर्षों की कड़ी मेहनत को पल भर में बर्बाद कर देती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की विफलता और बड़े स्तर पर नाराजगी
एसएफआई ने इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की नीतियों की तीखी आलोचना की है। छात्र नेताओं का स्पष्ट कहना है कि छात्रों को एक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा माहौल उपलब्ध कराने में वर्तमान शिक्षा मंत्रालय पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह मौजूदा संकट केवल एक छोटी प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह छात्र समुदाय के अधिकारों का हनन है। एसएफआई लंबे समय से सार्वजनिक शिक्षा और पारदर्शिता के लिए संघर्ष कर रही है। व्यवस्था में सुधार के लिए अब तुरंत कड़े और बड़े ठोस कदम उठाने होंगे।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और न्यायिक जांच की बुलंद मांग
उग्र प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को पूरी तरह समाप्त करने और परीक्षाओं के विकेंद्रीकरण की वकालत की गई है, ताकि राज्यों को अधिक अधिकार मिल सकें।
छात्रों ने सभी परीक्षाओं में हुई धांधली की एक स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने और मुख्य दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही मानसिक तनाव झेल रहे प्रभावित विद्यार्थियों को तुरंत उचित राहत और उचित वित्तीय मुआवजा देने की मांग भी प्रमुखता से की गई है।
Reported By: Sunita Gupta


