नीट पेपर लीक पर बढ़ा सियासी घमासान, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का बड़ा ऐलान

Delhi News: राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में धांधली की जवाबदेही तय करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिम्मेदारी है।

अभिजीत दीपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया था। इसके बाद रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। दीपके ने आरोप लगाया कि देश की राजनीति पिछले दस सालों से सिर्फ हिंदू-मुस्लिम एजेंडे के इर्द-गिर्द घूम रही है।

देश में बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग

सीजेपी नेता ने सरकार की प्राथमिकताओं में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी एक बेहद गंभीर मुद्दा बन चुकी है। यह आंदोलन सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके बाद शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नया एजेंडा तैयार करेंगे।

रविवार सुबह वालुज क्षेत्र स्थित अपने घर पहुंचने पर परिवार ने दीपके का स्वागत किया। इसके तुरंत बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने दोहराया कि जब तक केंद्रीय मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह देशव्यापी विरोध प्रदर्शन नहीं रुकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग में खामियों पर भारी हंगामा जारी है। प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाने के मुद्दे पर दीपके ने तीखा तंज कसा। उन्होंने पूछा कि अगर प्रधानमंत्री रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रुकवा सकते हैं, तो क्या वे देश में पेपर लीक नहीं रोक सकते।

दीपके ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए इस सफल प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि आज की नई पीढ़ी यानी ‘जेन जेड’ किसी से डरने वाली नहीं है। युवाओं को अपने हक और गलत व्यवस्था के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी चाहिए। इस विरोध प्रदर्शन में देश भर से करीब 7,000 लोग शामिल हुए थे।

राजनीतिक दलों से दूरी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

इस बीच प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए दीपके के आवास पर सुरक्षा व्यवस्था काफी बढ़ा दी है। स्थानीय पुलिस अधिकारी के मुताबिक पहले वहां 11 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जिनकी संख्या अब बढ़ाकर 15 कर दी गई है। यह सुरक्षा बल स्थानीय थाने और पुलिस मुख्यालय से तैनात किया गया है।

दीपके ने साफ किया कि उनके संगठन का किसी भी मुख्यधारा के राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। यह आंदोलन पूरी तरह से युवाओं और छात्रों के अधिकारों के लिए समर्पित है। जो दल समर्थन करना चाहते हैं, वे बाहर से कर सकते हैं, लेकिन वे किसी के साथ मंच साझा नहीं करेंगे।

शांतिपूर्ण आंदोलन और विरोधियों को करारा जवाब

प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तानी कहे जाने वाले बयानों पर दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूछा कि क्या सवाल पूछने वाले छात्र, विपक्ष और मीडियाकर्मी सभी देशद्रोही हैं। क्या सिर्फ सत्ताधारी दल के लोग ही सच्चे भारतीय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह पूरा आंदोलन बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आयोजित हुआ था।

उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आलोचनात्मक बयानों पर भी निशाना साधा। दीपके ने कहा कि फडणवीस को एक प्रगतिशील राज्य के मुख्यमंत्री की तरह सोचना चाहिए। डॉ. आंबेडकर की तस्वीर दिखाना या ‘जय भीम’ का नारा लगाना किसी भी तरह से देश में अराजकता फैलाना नहीं है।

शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए इस बड़े प्रदर्शन में सीजेपी के बैनर तले सैकड़ों छात्र जुटे थे। इस आंदोलन को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी बड़ा समर्थन मिला। इसके साथ ही वामपंथी छात्र संगठनों और कई वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।

Author: Harikarishan Sharma

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