Jharkhand News: भारत सरकार और राज्य सरकार की नेशनल स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत शुरू की गई वोकेशनल एजुकेशन व्यवस्था आज गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को बेहतरीन स्किल बेस्ड ट्रेनिंग देकर रोजगार योग्य बनाना था। हालांकि ग्राउंड रियलिटी में इसके अपेक्षित परिणाम नहीं दिख रहे हैं।
सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी की भारी कमी के कारण बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले प्रशिक्षकों का कहना है कि वीटीपी आधारित इम्प्लीमेंटेशन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। वर्ष 2014-15 में कक्षा 9 से 12 तक लागू इस योजना को बड़ा रिफॉर्म माना गया था।
रिक्रूटमेंट और ट्रांसफर प्रोसेस में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप
प्रशिक्षकों के अनुसार रिक्रूटमेंट, ट्रांसफर और एमओयू रिन्यूअल प्रोसेस के दौरान भारी गड़बड़ी हो रही है। इस सिस्टम में धड़ल्ले से कथित कैश डीलिंग की जा रही है। फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर अवैध तरीके से अपॉइंटमेंट हो रहे हैं। पसंदीदा पोस्टिंग पाने के लिए भी अतिरिक्त भुगतान की मांग की जा रही है।
इसके साथ ही इंडस्ट्रियल विजिट, गेस्ट लेक्चर और लैब एक्टिविटीज के लिए आवंटित होने वाले बजट के मिसयूज का भी बड़ा दावा किया गया है। इन गंभीर आरोपों के कारण जेईपीसी और संबंधित सरकारी विभागों की मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पूरी व्यवस्था पर अंगुली उठ रही है।
समय पर नहीं मिलता मानदेय और सुविधाएं भी गायब
वोकेशनल प्रशिक्षकों ने बताया कि उन्हें लंबे समय से समय पर नियमित मानदेय नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2019 के बाद से उनके वेतन में कोई नया संशोधन भी नहीं हुआ है। उनके वेतन से पीएफ, ईएसआईसी और टीडीएस की कटौती तो हो रही है, लेकिन उसका कोई पारदर्शी रिकॉर्ड नहीं है।
उचित मेडिकल सुविधाओं, लीव पॉलिसी और जॉब सिक्योरिटी की कमी ने प्रशिक्षकों की स्थिति को और ज्यादा दयनीय बना दिया है। पीड़ित प्रशिक्षकों ने इसे अपना आर्थिक और मानसिक शोषण करार दिया है। उन्होंने सरकार से मजबूत नीति सुधार, पारदर्शी ऑडिट और बेहतर गवर्नेंस लागू करने की पुरजोर मांग की है।
Author: Rohit Mahato


