Sikkim News: पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम के लाचेन क्षेत्र से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। यहां के ऐतिहासिक थंगू सेरतोक गुम्पा मठ में अचानक एक भयावह आग लग गई। इस भयंकर अग्निकांड ने पल भर में सब कुछ पूरी तरह तबाह कर दिया है।
यह दर्दनाक हादसा 5 जून की रात करीब 11 बजे हुआ। इस भीषण आग की लपटों ने न सिर्फ दशकों पुराने पवित्र बौद्ध मठ को अपनी चपेट में लिया, बल्कि पास में बने दो रिहायशी घरों को भी पूरी तरह से जलाकर मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।
वर्षों पुराने पवित्र अवशेष और मूर्तियां जलकर हुईं राख
लाचेन के पीपोन चो बांदु लाचेनपा ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। मठ के भीतर रखे किसी भी पवित्र सामान को सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।
इस हादसे में वर्षों पुराने पवित्र धार्मिक अवशेष, बहुमूल्य मूर्तियां, अत्यंत प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ और अन्य अमूल्य ऐतिहासिक सामग्रियां जलकर राख हो गईं। इस अपूरणीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक क्षति के कारण स्थानीय बौद्ध समुदाय के लोगों में भारी शोक की लहर फैली हुई है।
आधी रात को शॉर्ट सर्किट बनने की आशंका
शुरुआती सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, इस भयावह अग्निकांड का मुख्य कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। आधी रात के वक्त जब सभी लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी अचानक यह चिंगारी भड़की और पूरे मठ परिसर को अपने घेरे में ले लिया।
राहत की बात यह रही कि इस बड़े हादसे में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ है। किसी भी स्थानीय नागरिक या भिक्षु के घायल होने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। हालांकि, इस घटना से क्षेत्र की करोड़ों रुपये की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर नष्ट हो गई है।
थंगू सेरतोक गुम्पा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
इस प्रसिद्ध थंगू सेरतोक गुम्पा मठ का निर्माण लगभग वर्ष 1965 में किया गया था। यह पवित्र स्थान उत्तरी सिक्किम के निवासियों के लिए अगाध धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व रखता था। दशकों से यह थंगू और आसपास के गांवों की पूजा का मुख्य केंद्र था।
पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बेहद दुर्गम और इनएक्सेसिबल होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकीं। इसके बावजूद, स्थानीय निवासियों ने भारी मुस्तैदी दिखाई और अपनी जान जोखिम में डालकर खुद ही कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
Author: Bhutia Lepcha


