अल नीनो का दिखेगा रौद्र रूप, मौसम वैज्ञानिकों ने दी ‘गॉडजिला’ की चेतावनी, जानें भारत पर असर

Weather News: दुनिया भर के इंसानों और प्रकृति के लिए आने वाला समय एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है। खतरनाक अल नीनो मौसम प्रणाली के कारण इस साल के अंत तक और अगले साल तक वैश्विक तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।

प्रशांत महासागर में बार-बार पैदा होने वाली यह खतरनाक प्रणाली दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित ऑस्ट्रेलिया में भीषण सूखा और जंगल की आग का कारण बन सकती है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो सितंबर में अपने चरम पर पहुंच सकता है।

आखिर क्या है अल नीनो और क्यों है यह खतरनाक

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, अल नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के अत्यधिक गर्म होने से पैदा होता है। यह अल नीनो दक्षिणी दोलन (Enso) का हिस्सा है। इसके सक्रिय होने से समुद्र के ऊपर का वायुमंडलीय दबाव बहुत तेजी से गिर जाता है।

अल नीनो के वर्षों में वैश्विक तापमान सामान्य से कम से कम दो डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जाता है। डब्लूएमओ के अनुसार इस साल मध्य वर्ष तक इसके विकसित होने की नब्बे प्रतिशत संभावना है। इसके प्रभाव से दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और मध्य अफ्रीका में बेहद शुष्क मौसम का अनुभव होता है।

भारत में मानसून पर पड़ेगा इसका बुरा असर

अल नीनो के कारण विश्व स्तर पर भीषण लू, बाढ़ और सूखे के हालात पैदा होते हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो अल नीनो के सक्रिय होने वाले वर्षों के दौरान मानसून आमतौर पर काफी कमजोर हो जाता है। मजबूत अल नीनो इन मौसमी जोखिमों को कई गुना ज्यादा बढ़ा सकता है।

इस बार के चरम मौसम पैटर्न को कुछ मौसम विज्ञानी ‘गॉडजिला अल नीनो’ का नाम दे रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में शुष्क मौसम लंबा और अधिक कष्टदायी हो जाएगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भी लगातार इस मौसम प्रणाली पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

वैश्विक खाद्य प्रणालियों को लग सकता है बड़ा झटका

गॉडजिला जैसे भयंकर अल नीनो से दुनिया भर में फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। पश्चिम एशिया के संकट के कारण पहले ही वैश्विक बाजार में उर्वरकों की भारी कमी चल रही है। ऐसे में यह चरम मौसम पैटर्न सूखे और बाढ़ से खाद्य प्रणालियों को पूरी तरह बाधित कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव गहरा सकता है। समुद्र का तापमान बढ़ने से मछलियों की आबादी को भी बड़ा खतरा है। इसके कारण कृषि पर निर्भर ग्रामीण आबादी का शहरों की तरफ बड़े पैमाने पर पलायन हो सकता है।

बाढ़ और जंगल की आग का बढ़ेगा बड़ा खतरा

जलवायु विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार, जब अल नीनो के कारण वर्षा वाले क्षेत्र मध्य प्रशांत महासागर में स्थानांतरित होते हैं, तो वहां अत्यधिक बारिश होती है। लेकिन इसके विपरीत पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र जैसे इंडोनेशिया और फिलीपींस में भीषण सूखा पड़ता है। इससे भारत और ऑस्ट्रेलिया में भी संकट बढ़ता है।

दूसरी तरफ इसके प्रभाव से इक्वाडोर, पेरू, अमेरिका और मैक्सिको के कुछ हिस्सों में भारी नमी के साथ विनाशकारी बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। अल नीनो के असाधारण रूप से मजबूत होने पर समाज को जंगल की आग, वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट और फसलों की बर्बादी का सामना करना पड़ेगा।

Author: Shilla Bhatia

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