Delhi News: भारत अब अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से मजबूत करने की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। केंद्र सरकार ने ‘स्पेस बेस्ड सर्विलांस फेज-III’ परियोजना के तहत 52 सैटेलाइटों के एक विशाल निगरानी नेटवर्क को अपनी मंजूरी दे दी है।
इस बेहद महत्वाकांक्षी और गुप्त नेटवर्क को साल 2026 से 2029 के बीच चरणबद्ध तरीके से अंतरिक्ष में तैनात किया जाएगा। इस पूरी परियोजना का मुख्य उद्देश्य चीन और पाकिस्तान से जुड़े सामरिक खतरों पर लगातार नजर रखना, भारतीय सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों की अभेद्य निगरानी करना है।
निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी से इतिहास रचेगा भारत
इस रक्षा परियोजना की सबसे खास बात यह है कि कुल 52 में से 31 सैटेलाइट निजी कंपनियों द्वारा तैयार और संचालित किए जाएंगे। यह भारत की नई स्पेस पॉलिसी 2026 के तहत देश के निजी क्षेत्र की बढ़ती सैन्य और रणनीतिक भागीदारी को साफ तौर पर दर्शाता है।
सरकार का मानना है कि भविष्य के युद्धों में अंतरिक्ष आधारित तकनीक ही सबसे निर्णायक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पूरी योजना साल 2025 में कोलकाता में घोषित जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन पर आधारित है। इस नीति में पहली बार अंतरिक्ष को औपचारिक रूप से युद्ध रणनीति का हिस्सा माना गया है।
लो-अर्थ ऑर्बिट में बनेगा सुरक्षित और अभेद्य नेटवर्क
भारतीय सेना का यह नया ढांचा लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में कई छोटे और अत्यधिक तेज़ सैटेलाइटों के नेटवर्क पर आधारित होगा। बड़े और सीमित संख्या वाले पारंपरिक सैटेलाइटों की तुलना में यह नई प्रणाली सामरिक रूप से बहुत अधिक सुरक्षित मानी जाती है।
इस तकनीक के कारण किसी दुश्मन देश के हमले की स्थिति में भी भारत का पूरा नेटवर्क प्रभावित नहीं होगा और सीमाओं की निगरानी लगातार जारी रह सकेगी। इन सैटेलाइटों में अत्याधुनिक सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) और हाई-रिजॉल्यूशन ऑप्टिकल सेंसर लगाए जाएंगे।
खराब मौसम और रात के अंधेरे में भी होगी सटीक निगरानी
इन अत्याधुनिक रडार और सेंसर की मदद से घने बादलों, खराब मौसम या रात के घने अंधेरे में भी दुश्मन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी। साथ ही, इसका सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम सेना के कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क को नई ताकत देगा।
इसके अलावा, कुछ विशेष सैटेलाइट अंतरिक्ष में दूसरे देशों के सैटेलाइटों और उनकी संदिग्ध गतिविधियों की काउंटर-निगरानी भी करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार भारत केवल जासूसी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और संभावित काउंटर-स्पेस रक्षा क्षमताओं पर भी तेजी से काम कर रहा है।
दुश्मन के सैटेलाइट सिस्टम को हवा में ठप करने की तैयारी
भारत की इस नई रक्षा तकनीक में दुश्मन के सैटेलाइट सिस्टम को जरूरत पड़ने पर हवा में ही बाधित करने और अंतरिक्ष में अपनी सुरक्षा बढ़ाने की गुप्त तकनीक शामिल हो सकती है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश भी अब इसी तरह के छोटे वितरित सैटेलाइट नेटवर्क की ओर बढ़ रहे हैं।
इसकी मुख्य वजह एंटी-सैटेलाइट हथियारों के बढ़ते वैश्विक खतरे हैं। भारत ने भी इन्हीं अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीख लेते हुए अधिक लचीला और मजबूत अंतरिक्ष ढांचा अपनाने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं रहेंगे।
Author: Gaurav Malhotra


