India’s Wuhan Market: भारत का वो अनोखा बाजार जहां बिकता है कुत्ता-बिल्ली और सांप का मांस, सोशल मीडिया पर छिड़ा भारी विवाद

Nagaland News: भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के स्थानीय बाजारों के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में चीन के वुहान मार्केट की तरह खुलेआम जानवरों का मांस बिकता दिखाई दे रहा है।

कोहिमा और दिमापुर के इन बाजारों में कुत्ते और बिल्लियों का मांस खुलेआम बिक रहा है। इसके अलावा बाजारों में चूहे, छिपकली, सांप, चमगादड़ और कई तरह के कीड़े-मकौड़े भी बेचे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीरें आने के बाद पूरे देश में तीखी बहस छिड़ गई है।

नागा समुदाय की सदियों पुरानी परंपरा और मान्यताएं

स्थानीय नागा समुदाय में इन जीवों का मांस खाना एक सदियों पुरानी पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत माना जाता है। स्थानीय लोग इस मांस को न केवल स्वादिष्ट मानते हैं बल्कि सेहत के लिए फायदेमंद भी बताते हैं। खासकर चोटिल लोगों और एथलीट्स को प्रोटीन के लिए कुत्ते का मांस देते हैं।

दूसरी तरफ पशु अधिकार संगठन इस पूरे व्यापार को अवैध और क्रूरता का बड़ा उदाहरण बता रहे हैं। कोहिमा के सुपर मार्केट और दिमापुर के बाजारों में सुबह से ही इन जानवरों की बिक्री शुरू हो जाती है। यहां मांग के अनुसार जिंदा कुत्तों को काटकर मांस बेचा जाता है।

बैन को लेकर कोर्ट में जारी है कानूनी लड़ाई

नागालैंड सरकार ने साल 2020 में कुत्ते के मांस के व्यापार और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। लेकिन साल 2023 में कोहिमा हाईकोर्ट ने इस सरकारी प्रतिबंध को कुछ हद तक खारिज कर दिया। साल 2026 में भी गौहाटी हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई जारी है।

इस संवेदनशील मामले में फिलहाल कोर्ट का स्प्लिट वर्डिक्ट यानी खंडित फैसला सामने आया है। पेटा (PETA) और ह्यूमेन सोसाइटी जैसे बड़े पशु अधिकार संगठन लगातार इस पर दोबारा पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। वे असम से होने वाली इन जानवरों की तस्करी का विरोध कर रहे हैं।

सांस्कृतिक स्वतंत्रता बनाम पशु क्रूरता पर बड़ी बहस

देशभर के पशु प्रेमी इस पूरी प्रक्रिया को बेहद अमानवीय और क्रूर मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस बात से नाराज हैं कि जहां देश में कई जानवर पवित्र पूजनीय हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसा हो रहा है। इसके विपरीत स्थानीय लोग अपनी खान-पान की स्वतंत्रता की बात कह रहे हैं।

स्थानीय लोगों का तर्क है कि हर समुदाय की अपनी अलग भौगोलिक परिस्थितियां और खान-पान की आदतें होती हैं। हालांकि पूरे नागालैंड में सभी लोग ऐसा भोजन नहीं करते हैं। राज्य के कई आधुनिक नागा परिवार केवल पारंपरिक चिकन, पोर्क, बीफ और सामान्य मछली ही खाना पसंद करते हैं।

Author: Toshi Jamir

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